UP में ट्रैफिक नियम तोड़ना अब पड़ेगा भारी, योगी सरकार ने बदला सालों पुराना कानून

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UP की सड़कों पर अगर आप भी इस भरोसे गाड़ी चलाते थे कि चालान कटने के बाद कुछ समय इंतज़ार करेंगे और लोक अदालत में मामला रफा-दफा हो जाएगा, तो अब अपनी यह आदत बदल लीजिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश की यातायात व्यवस्था को सुधारने और लापरवाह ड्राइवरों पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक नया अध्यादेश लाया गया है, जो सड़क सुरक्षा के नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।

यूपी में अब नहीं खत्म होंगे पेंडिंग चालान

उत्तर प्रदेश में अब तक 1979 से चली आ रही एक पुरानी व्यवस्था लागू थी। इसके तहत अगर किसी का ट्रैफिक चालान कटता था और वह उसे नहीं भरता था, तो एक तय समय के बाद लोक अदालत के जरिए वे मामले ‘एबेट’ यानी स्वतः समाप्त हो जाते थे। बहुत से लोग इसी का फायदा उठाते थे। वे सोचते थे कि आज नहीं तो कल जुर्माना अपने आप खत्म हो ही जाएगा। लेकिन अब UP सरकार ने इस लूपहोल को पूरी तरह बंद कर दिया है। नए संशोधन के बाद अब आपके पेंडिंग चालान सालों-साल बने रहेंगे जब तक आप उन्हें भर नहीं देते।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लिया गया फैसला

यह बदलाव सिर्फ सरकार की इच्छा नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन भी है। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त निर्देश दिए थे। इसी को आधार बनाकर UP कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश दंड विधि (संशोधन) अध्यादेश-2026’ को मंजूरी दी है। सरकार का मकसद साफ है—सड़कों पर अनुशासन लाना और दुर्घटनाओं को कम करना। जब लोगों को पता होगा कि जुर्माने से बचने का कोई रास्ता नहीं है, तो वे नियमों का पालन करने के लिए मजबूर होंगे।

इन तीन स्थितियों में अब बिल्कुल नहीं मिलेगी राहत

नए अध्यादेश के मुताबिक, UP में अब तीन तरह के मामलों में कोई रियायत नहीं दी जाएगी:

  1. बार-बार नियम तोड़ना: अगर आप बार-बार गलती करते पकड़े जाते हैं, तो आपके पुराने सभी रिकॉर्ड और चालान पेंडिंग रहेंगे।

  2. जेल की सजा वाले मामले: जिन अपराधों में कानूनन जेल जाना तय है, उन्हें अब समय बीतने के आधार पर बंद नहीं किया जा सकेगा।

  3. गैर-शमनीय अपराध: ऐसे गंभीर मामले जिनमें मौके पर समझौता या जुर्माना भरकर निपटाना मुमकिन नहीं है, वे अब अदालत की प्रक्रिया से ही गुजरेंगे।

आम जनता पर क्या होगा असर?

UP के परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन का मानना है कि इस सख्ती से सड़क हादसों में कमी आएगी। अब अगर आपके वाहन पर कोई पुराना चालान बकाया है, तो आपको गाड़ी की फिटनेस सर्टिफिकेट, एनओसी (NOC) या अन्य सरकारी काम कराने में दिक्कत आएगी। यानी बिना जुर्माना भरे गाड़ी से जुड़ा कोई भी कागजी काम करवाना नामुमकिन हो जाएगा। UP सरकार का यह कदम उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सड़क पर दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं।

देखें तो UP में सड़क सुरक्षा को लेकर अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। दशकों पुराने कानून में बदलाव करके सरकार ने यह साफ कर दिया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं और लापरवाही की कोई जगह नहीं है। इसलिए सुरक्षित चलिए और यातायात नियमों का पालन कीजिए, क्योंकि अब “बच निकलने” वाली पुरानी तरकीब काम नहीं आएगी। UP की सड़कों को सुरक्षित बनाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

यह भी पढ़ें: Ambedkar Murti Vikas Yojana: यूपी की सभी 403 विधानसभाओं में चमकेगी महापुरुषों की विरासत, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

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