UP Electric bus plan: उत्तर प्रदेश के शहरों में सफर करने वालों के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। अगर आप भी रोजमर्रा के सफर में ऑटो की धक्का-मुक्की या ट्रैफिक से परेशान होते हैं, तो अब आपको जल्द ही राहत मिलने वाली है। योगी सरकार ने राज्य के शहरी ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली है, जिससे आपका सफर न सिर्फ आरामदायक होगा बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा।
Yogi Cabinet का फैसला और नई योजना
बुधवार शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया। इस बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिसमें सबसे अहम फैसला UP के 18 बड़े शहरों में 1725 नई वातानुकूलित (एसी) इलेक्ट्रिक बसों को चलाने का है। सरकार का मकसद साफ है—शहरों के ट्रैफिक को सुधारना और लोगों को सुरक्षित व आधुनिक सफर देना।
क्या है जीसीसी मॉडल और कैसे चलेंगी बसें?
अब आपके मन में सवाल होगा कि ये बसें कैसे चलेंगी? दरअसल, इन बसों का संचालन जीसीसी मॉडल (ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट) के तहत किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि बसें खरीदने, उनके चार्जिंग स्टेशन बनाने, ड्राइवर रखने और बसों की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनियों (निजी ऑपरेटरों) की होगी। सरकार इन ऑपरेटरों को उनके काम के आधार पर भुगतान करेगी। खास बात यह है कि यह अनुबंध 12 सालों के लिए होगा, जिससे व्यवस्था लंबे समय तक सुचारू रूप से चलेगी।
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किन शहरों को मिलेगा फायदा और कितनी मिलेगी सब्सिडी?
इस योजना में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा (जेवर सहित) जैसे 18 शहर शामिल हैं। यहां 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई वाली बसें चलाई जाएंगी। सरकार इन बसों को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को सब्सिडी भी दे रही है। 12 मीटर वाली बस पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर वाली बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। बसों के डिपो के लिए जमीन नगर निगम और नोएडा अथॉरिटी मुफ्त में देगी।
UP में इलेक्ट्रिक बसें आने से आम जनता का सफर तो आसान होगा ही, साथ ही प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी। फिलहाल राज्य में 743 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, और इन नई बसों के आने के बाद उत्तर प्रदेश का शहरी ट्रांसपोर्ट वाकई काफी हाईटेक हो जाएगा।
