CM Yogi on UP Tourism: उत्तर प्रदेश की पहचान अब सिर्फ एक बड़े राज्य के रूप में नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के रूप में मजबूत हो रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यटन, विरासत संरक्षण और Gyan Bharatam Mission की एक अहम समीक्षा बैठक की। इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यूपी सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।
सीएम योगी ने जोर दिया कि पर्यटन के विकास को सिर्फ होटल या सड़कों के निर्माण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार के नए अवसरों, पारंपरिक कलाओं और वैश्विक पहचान से जोड़ना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश के विकास और विरासत को लेकर क्या बड़े फैसले लिए गए हैं।
प्राचीन पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण
बैठक में भारतीय ज्ञान परंपरा को सहेजने के लिए शुरू किए गए मिशन की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राचीन पांडुलिपियां सिर्फ पुराने दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सभ्यता, दर्शन और विज्ञान की अमूल्य धरोहर हैं। आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने के लिए इनका संरक्षण करना बहुत आवश्यक है।
इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि अब तक 13 लाख 70 हजार से ज्यादा प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और संरक्षण का काम पूरा किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य इन सभी ऐतिहासिक दस्तावेजों को आधुनिक तकनीक के जरिए सुरक्षित करना है ताकि शोधकर्ताओं और आम लोगों को अपनी प्राचीन विद्या को समझने में आसानी हो।

पर्यटन नीति-2022 में बदलाव की तैयारी
उत्तर प्रदेश को देश में निवेश और नवाचार का सबसे बड़ा केंद्र बनाने के लिए पर्यटन नीति-2022 में कुछ जरूरी बदलावों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्य की नई पर्यटन नीति ऐसी होनी चाहिए जो न सिर्फ देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करे, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करे।
इस नीति के तहत राज्य में कुछ नए टूरिस्ट सर्किट विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसमें बाबा के भक्तों के लिए ‘नीम करोली बाबा सर्किट’ और इतिहास प्रेमियों के लिए ‘बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट’ का विकास शामिल है। इसके साथ ही कृषि पर्यटन (एग्री टूरिज्म), वाइनयार्ड पर्यटन और पारंपरिक विरासत का अनुभव कराने वाले केंद्रों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पर्यटकों को यूपी में एक बिल्कुल नया और अनूठा अनुभव मिल सके।
लखनऊ और आगरा में बनेंगे खास संग्रहालय
देश के गौरवशाली सैन्य इतिहास और राष्ट्रनायकों की गाथाओं को युवाओं तक पहुंचाने के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई। लखनऊ में हाल ही में बनी ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ और वहां निर्माणाधीन ‘आईएनएस गोमती शौर्य संग्रहालय’ को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को मजबूत करेगी। इस संग्रहालय में भारतीय नौसेना के इतिहास, समुद्री शक्ति और अभियानों को इंटरैक्टिव गैलरी, सिम्युलेटर और आधुनिक तकनीक के जरिए दिखाया जाएगा। इसका जिम्मा लखनऊ विकास प्राधिकरण को सौंपने की बात कही गई है।
दूसरी तरफ, आगरा में बन रहे ‘छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय’ की समीक्षा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि शिवाजी महाराज के जीवन, सुशासन और उनके शौर्य को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जनता के सामने लाया जाए। इसके साथ ही इस संग्रहालय में मराठा साम्राज्य और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक संबंधों, काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनरुद्धार में माता अहिल्याबाई होल्कर के योगदान और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की कहानियों को भी प्रमुखता से जगह दी जाएगी।
सीतापुर नैमिषारण्य के समग्र विकास पर जोर
धार्मिक और पौराणिक महत्व के स्थलों के कायाकल्प की कड़ी में सीतापुर नैमिषारण्य के समग्र विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नैमिषारण्य केवल एक सामान्य तीर्थस्थल नहीं है, बल्कि यह हमारी वैदिक ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक साधना की जीवंत स्थली है। इसलिए इसके विकास के दौरान धार्मिक आस्था और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना बहुत जरूरी है।
तैयार किए गए मास्टर प्लान के अनुसार, यहां वेद विज्ञान केंद्र, वेदारण्यम वेलनेस पार्क, राजघाट रिवरफ्रंट के साथ-साथ व्यास गद्दी, सूत गद्दी, हनुमानगढ़ी और देवदेवेश्वर मंदिर परिसर का सुंदरीकरण किया जाएगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां नैमिष हाट, यात्री निवास और एक आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जा रहा है। इस सेंटर में लेजर शो, प्रोजेक्शन मैपिंग और पारंपरिक ग्रामीण जीवन के जरिए लोगों को वेदों की जन्मस्थली के इतिहास से रूबरू कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस पूरे काम को मिशन मोड में करने के आदेश दिए हैं।
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विंध्याचल और चित्रकूट के लिए मास्टर प्लान
मिर्जापुर के प्रसिद्ध विंध्याचल क्षेत्र के लिए बन रहे इंटीग्रेटेड मास्टर प्लान की समीक्षा के दौरान बताया गया कि साल 2050 तक यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को ध्यान में रखकर बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। मां विंध्यवासिनी धाम के त्रिकोण परिक्रमा क्षेत्र को भी बेहतर बनाया जा रहा है। सीएम योगी ने कहा कि देश के प्रमुख शक्तिपीठों के पास माता सती की पौराणिक कथाओं को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित करने के लिए निजी क्षेत्र की मदद ली जानी चाहिए। इसके साथ ही, चित्रकूट में स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक और मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए वहां भी संरक्षण कार्य और पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम साफ दिखाता है कि राज्य में विकास की गति को केवल आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक ही सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि उसे अपनी प्राचीन संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञान परंपरा का संरक्षण, नए पर्यटन सर्किटों का निर्माण और धार्मिक स्थलों का मास्टर प्लान के तहत विकास न केवल उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य को दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान भी दिलाएगा।

