Sanjeev Arora Arrest: पंजाब के बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा गिरफ्तार: ED की छापेमारी के बाद बड़ी कार्रवाई, जानें क्या है पूरा मामला

Sanjeev Arora Arrest

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Sanjeev Arora Arrest: पंजाब की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। ED ने लंबी पूछताछ और छापेमारी के बाद पंजाब के बिजली मंत्री और लुधियाना वेस्ट से विधायक Sanjeev Arora को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह से ही मंत्री के चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर स्थित ठिकानों पर हड़कंप मचा हुआ था, जिसका समापन इस बड़ी गिरफ्तारी के साथ हुआ।

सुबह शुरू हुई रेड और शाम को गिरफ्तारी

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ED की टीमों ने शनिवार तड़के एक साथ Sanjeev Arora और उनसे जुड़ी संस्थाओं के चार ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया था। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से शुरू हुई थी। कड़ी सुरक्षा के बीच अधिकारियों ने दस्तावेजों की पड़ताल की और अंततः चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित उनके सरकारी आवास से उन्हें हिरासत में ले लिया गया। गहन पूछताछ के बाद एजेंसी ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

PMLA एक्ट के तहत हुए Sanjeev Arora Arrest

जांच एजेंसी ने यह स्पष्ट किया है कि Sanjeev Arora पर यह शिकंजा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत कसा गया है। उन पर वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेनदेन के गंभीर आरोप हैं। यह पहली बार नहीं है जब मंत्री जांच के घेरे में आए हों; इस साल उनके खिलाफ यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले अप्रैल और इसी महीने की शुरुआत में भी उनके ठिकानों की तलाशी ली गई थी।

पंजाब सरकार में बिजली जैसा महत्वपूर्ण विभाग संभालने वाले Sanjeev Arora के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का दायरा काफी विस्तृत है। सूत्रों का कहना है कि छापेमारी के दौरान ED को कुछ ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं, जो करोड़ों रुपये के संदिग्ध हेरफेर की ओर इशारा करते हैं। एजेंसी अब इन दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धन शोधन का यह जाल कहां तक फैला हुआ है।

सियासी गलियारों में मचा हड़कंप

मंत्री की गिरफ्तारी के बाद पंजाब से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक पारा चढ़ गया है। आगामी चुनावों के मद्देनजर इस कार्रवाई को काफी अहम माना जा रहा है। जहां विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस बता रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया जा रहा है। हालांकि, ED का कहना है कि यह पूरी तरह से सबूतों और तथ्यों के आधार पर की गई पेशेवर जांच का हिस्सा है।

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