दुनिया भर में चल रहे तनाव और पश्चिम एशिया के संकट ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। सोमवार को रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने 'कर्तव्य भवन-2' में मंत्रियों के अनौपचारिक सशक्त समूह (IGoM) की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि वैश्विक परिस्थितियों का भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर क्या असर पड़ रहा है और इससे निपटने के क्या रास्ते हो सकते हैं।

हिंद महासागर और ईंधन आपूर्ति पर मंथन
Rajnath Singh की इस High Level Meeting में मुख्य रूप से हिंद महासागर क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा की स्थिति पर चर्चा की गई। दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट वह रास्ता है जहां से भारत के लिए ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की बड़ी खेप आती है। युद्ध की वजह से इस रास्ते पर जोखिम बढ़ गया है, जिससे सप्लाई चेन बाधित होने का डर है।
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस मुद्दे पर माथापच्ची की है। इससे पहले मार्च और अप्रैल में भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बैठकें हो चुकी हैं। मंत्रियों के इस समूह का पूरा ध्यान इस बात पर है कि अगर ग्लोबल मार्केट में कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई रुकती है, तो भारत के पास क्या विकल्प होंगे।

पीएम मोदी का ‘आर्थिक आत्मरक्षा’ मंत्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में देशवासियों से इस मुश्किल घड़ी में एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि आज के दौर में संसाधनों को बचाना ही सच्ची देशभक्ति है। पीएम ने लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कुछ खास कदम उठाने को कहा है, जैसे कि एक साल तक सोने की खरीदारी टालना और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचना।

प्रधानमंत्री का मानना है कि अगर हम ‘मेड इन इंडिया’ प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दें और अपनी शादियां या छुट्टियां भारत में ही मनाएं, तो हमारा रुपया और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत रहेगा। उन्होंने किसानों से भी प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की है ताकि रसायनों पर होने वाला खर्च कम किया जा सके।
बचत और जिम्मेदारी से राष्ट्र सेवा
सरकार अब वर्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है, ताकि आने-जाने में होने वाले ईंधन के खर्च को कम किया जा सके। पीएम ने सुझाव दिया है कि लोग कार-पूलिंग करें, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करें। यह छोटे-छोटे कदम सामूहिक रूप से देश की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा सहारा दे सकते हैं।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh के नेतृत्व में हुई यह बैठक यह साफ करती है कि सरकार हर तरह की चुनौती के लिए तैयार है। एक तरफ जहां रक्षा और कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों से भी सहयोग की उम्मीद की जा रही है। अगर हम अपनी रोजमर्रा की आदतों में थोड़ा बदलाव करके संसाधनों की बचत करते हैं, तो हम न केवल अपने घर का बजट सुधारेंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी सुरक्षित रखेंगे। यह समय घबराने का नहीं, बल्कि समझदारी और जिम्मेदारी दिखाने का है।




