प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात दौरा: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में शामिल होंगे

सोमनाथ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से 12 जनवरी तक गुजरात का दौरा करेंगे, जिसमें वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री का कार्यक्रम धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में संतुलित रहेगा।

सोमनाथ में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

प्रधानमंत्री मोदी 10 जनवरी को सोमनाथ पहुंचेंगे। उसी दिन रात करीब 8 बजे वे ओंकार मंत्र का जाप करेंगे और इसके बाद सोमनाथ मंदिर में विशेष ड्रोन शो का आनंद लेंगे। 11 जनवरी की सुबह करीब 9:45 बजे, पीएम मोदी शौर्य यात्रा में शामिल होंगे। यह यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों की स्मृति में आयोजित की जाती है।

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शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकलेगा, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक है। इसके बाद, पीएम मोदी सुबह लगभग 10:15 बजे सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद वे 11 बजे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ की दिव्य ऊर्जा सदियों से लोगों में आस्था, साहस और आत्मसम्मान का दीपक प्रज्वलित करती रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “पवित्र सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से लोगों की चेतना को जागृत करती रही है। यहां से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा युगों-युगों तक आस्था, साहस और आत्मसम्मान का दीपक प्रज्वलित करती रहेगी।”

अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक कार्यक्रम

प्रधानमंत्री 12 जनवरी को अहमदाबाद में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे और साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव में भाग लेंगे।

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इसके अलावा, पीएम मोदी वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन गुजरात और भारत की क्षेत्रीय विकास योजनाओं, नवीन निवेश अवसरों, और स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण मंच है।

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सोमनाथ धाम का आध्यात्मिक महत्व

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि सोमनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उनका कहना है कि भगवान श्री सोमनाथ सृष्टि के कण-कण में विराजते हैं और उनकी अखंड आस्था अनंत काल से निरंतर प्रवाहित होती रही है।

उन्होंने संस्कृत श्लोक आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै साझा करते हुए कहा कि सोमनाथ से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा सदियों तक लोगों की चेतना को जागृत करती रहेगी।

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