Padma Shri Award 2026: संथाली लेखक चरण हेमब्रम और लोक कलाकार गफरुद्दीन मेवाती होंगे सम्मानित

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मयूरभंज, ओडिशा: केंद्र सरकार ने रविवार को घोषणा की कि संथाली भाषा और साहित्य के वरिष्ठ लेखक चरण हेमब्रम को साहित्य के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए वर्ष 2026 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान उन्हें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में प्रदान किया जाएगा। इस घोषणा के बाद संथाली साहित्य और आदिवासी समाज में खुशी और गर्व का माहौल है, क्योंकि इसे केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी सांस्कृतिक परंपरा का सम्मान माना जा रहा है।

ANI से बातचीत में चरण हेमब्रम ने इस सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद खुशी और संतोष का दिन है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक निस्वार्थ भाव से किए गए उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना प्रेरणादायक है। हेमब्रम ने बताया कि उनका जीवन लक्ष्य शिक्षा के माध्यम से संथाली आदिवासी समुदाय को सामाजिक और बौद्धिक रूप से सशक्त बनाना रहा है। उन्होंने कहा कि एक समय यह समुदाय पिछड़ेपन और अंधविश्वासों से जूझ रहा था, ऐसे में उन्होंने खुद को शिक्षा और साहित्य के जरिए लोगों को जागरूक करने के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा, “संथाली आदिवासी समुदाय एक दौर में काफी पिछड़ा हुआ था और कई अंधविश्वासों में फंसा हुआ था। मैंने शिक्षा को माध्यम बनाकर इन चुनौतियों से उबरने में उनकी मदद करने का संकल्प लिया। इसी मिशन के कारण मैंने साहित्य पर ध्यान केंद्रित किया। वर्षों से एक स्वयंसेवक के रूप में काम किया और आज उस कार्य को पहचान मिलना मेरे लिए बेहद संतोषजनक है।”

इसी क्रम में, केंद्र सरकार ने राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कलाकार गफरुद्दीन मेवाती को भी कला के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। गफरुद्दीन मेवाती राजस्थान के उन चुनिंदा लोक कलाकारों में से हैं, जिन्होंने पारंपरिक लोक संगीत और वाद्य यंत्रों को जीवित रखने के लिए जीवन समर्पित कर दिया।

ANI से बातचीत में गफरुद्दीन मेवाती ने कहा कि उनके जीवन के संघर्षों को आखिरकार पहचान मिलना उनके लिए भावुक क्षण है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने पिता के साथ सात वर्षों तक गांव-गांव घूमकर इस कला को सीखा और संरक्षित किया। इसके बाद उन्होंने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कई बच्चों और युवाओं को भी प्रशिक्षित किया।

मेवाती ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि मेरे जीवन के संघर्ष का नतीजा आज सामने आया है। यह मेरी आठवीं पीढ़ी है जो इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। मेरा बेटा और पोते भी इसे सीख रहे हैं। मैंने गजल, कव्वाली, ब्रज के लोक गीत, भजन, मेवाती और दोहा धनी गाए हैं। यह लोक परंपरा मेरे लिए सिर्फ कला नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा रही है।”

गफरुद्दीन मेवाती विशेष रूप से भपंग वाद्य यंत्र बजाने और उसके माध्यम से पारंपरिक लोक कथाएं प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। भपंग एक ऐसा लोक वाद्य यंत्र है, जो आज के दौर में विलुप्त होने की कगार पर है, लेकिन मेवाती ने अपनी साधना और प्रस्तुतियों के जरिए इसे राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाकर नई पहचान दिलाई है।

गृह मंत्रालय द्वारा घोषित पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं। इन्हें तीन श्रेणियों—पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री—में प्रदान किया जाता है। ये सम्मान कला, साहित्य, शिक्षा, समाज सेवा, विज्ञान और इंजीनियरिंग, चिकित्सा, खेल, व्यापार, उद्योग और सिविल सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देते हैं।

वर्ष 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। इस वर्ष पद्म विभूषण से मरणोपरांत सम्मानित होने वालों में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र शामिल हैं। वहीं, पद्म भूषण पुरस्कार पार्श्व गायिका अलका याग्निक, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन (मरणोपरांत) और मशहूर अभिनेता ममूटी को प्रदान किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चरण हेमब्रम और गफरुद्दीन मेवाती जैसे व्यक्तित्वों को पद्म श्री से सम्मानित किया जाना “जनता के पद्म” की भावना को मजबूत करता है। यह उन लोगों के कार्यों को सामने लाता है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद जमीनी स्तर पर समाज, भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है।

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