‘ऑपरेशन त्राशी-I’ में शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया को आज सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

ऑपरेशन त्राशी-I

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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए उत्तराखंड के लाल हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया को आज 20 जनवरी को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उनका पार्थिव शरीर हेलीकॉप्टर के माध्यम से बागेश्वर लाया जाएगा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सिंहपोरा क्षेत्र में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान आतंकियों से हुई मुठभेड़ में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सेना और चिकित्सा दल द्वारा उन्हें बचाने के हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अंतिम सांस ली।

स्पेशल फोर्सेस का हिस्सा थे गजेंद्र सिंह

हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेस इकाई का हिस्सा थे। रविवार को सुरक्षा एजेंसियों को सिंहपोरा इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला कर दिया, जिसमें आठ जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान हवलदार गजेंद्र सिंह ने वीरगति प्राप्त की।

पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर

शहीद जवान की खबर मिलते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के बीथी गांव, जहां के वह मूल निवासी थे, वहां मातम का माहौल है। गांव और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। हर आंख नम थी और माहौल पूरी तरह गमगीन नजर आया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि देश ने एक वीर सपूत खो दिया है, जिनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।

2004 में सेना में हुए थे भर्ती

हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया साल 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। पैरा (स्पेशल फोर्स) जैसी कठिन और जोखिम भरी यूनिट में रहते हुए उन्होंने वर्षों तक अदम्य साहस, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा का परिचय दिया। वह भारतीय सेना के विशेष सुरक्षाबल में पैराट्रूपर के रूप में तैनात थे।

परिवार के अनुसार, गजेंद्र सिंह अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं, जो देहरादून में रहते हैं। उनके चचेरे भाई और रानीखेत में तैनात सैनिक गिरीश गड़िया ने बताया कि गजेंद्र सिंह दो माह पहले अक्तूबर में 15 दिन के अवकाश पर गांव आए थे और माता-पिता से मिलकर लौटे थे।

ऑपरेशन त्राशी-I

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

आज उनका पार्थिव शरीर बागेश्वर लाया जाएगा, जहां कौसानी सिग्नल के जवानों द्वारा सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर सपूत को पूरा उत्तराखंड और देश नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

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