Omaxe Residency Lucknow लखनऊ में रहने वाले लोगों के लिए एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के सबसे पॉश इलाकों में गिने जाने वाले शहीद पथ पर स्थित Omaxe Residency Lucknow में एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का खेल चल रहा था, जिसका पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने गुरुवार की देर रात इस हाई-प्रोफाइल सोसाइटी में अचानक छापेमारी की। पुलिस को खबर मिली थी कि यहाँ की एक बिल्डिंग से अवैध तरीके से कॉल सेंटर चलाया जा रहा है, जहाँ से लोगों को चूना लगाया जा रहा था। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर हर कोई दंग रह गया।
देर रात सादे कपड़ों में पहुंची पुलिस और शुरू हुई धरपकड़
इस पूरी कार्रवाई को इतनी सीक्रेट रखा गया कि सोसाइटी के लोगों को भी भनक नहीं लगी। दरअसल, जालसाजों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए एडीसीपी किरन यादव समेत कई बड़े पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में Omaxe Residency Lucknow पहुंचे थे। गुरुवार रात करीब 1 बजे शुरू हुई यह छापेमारी शुक्रवार सुबह तक चलती रही। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने मौके से आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। जब इन आरोपियों को बाहर निकाला गया, तो वे मीडिया और पुलिस से अपने मुंह छिपाते नजर आए। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में मोबाइल, लैपटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किए हैं।
कस्टमर सपोर्ट के नाम पर विदेशी नंबरों से होती थी ठगी
शुरुआती जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे काफी चौंकाने वाली हैं। यह फर्जी कॉल सेंटर Omaxe Residency Lucknow से बैठकर सीधे विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहा था। चूंकि विदेशों से कॉल आते थे, इसलिए ये लोग रात के समय अपना काम एक्टिव रखते थे। ये जालसाज कस्टमर सपोर्ट सर्विस के नाम पर लोगों से बात करते थे और उन्हें अपनी मीठी-मीठी बातों में फंसा लेते थे। जैसे ही सामने वाला इनके झांसे में आता, ये उनके मोबाइल का ओटीपी और बैंक खातों से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते थे और पलक झपकते ही पूरा बैंक खाता साफ कर देते थे।
ओपनर और क्लोजर की जोड़ी मिलकर करती थी सारा खेल
पुलिस की पूछताछ में यह भी पता चला है कि ठगी के इस धंधे को चलाने के लिए बकायदा कॉर्पोरेट स्टाइल में टीमें बनाई गई थीं। Omaxe Residency Lucknow के इस सेंटर में हर टीम के अंदर दो लोग शामिल होते थे। इनमें से एक को ‘ओपनर’ और दूसरे को ‘क्लोजर’ कहा जाता था। ओपनर का काम शिकार को फंसाना और बातचीत की शुरुआत करना होता था, जबकि क्लोजर पूरी डील को फाइनल करके पैसे उड़ाने का काम करता था। पुलिस अब इन दोनों रोल के बारे में और गहराई से जानकारी जुटा रही है।
समिट बिल्डिंग के पुराने केस से जुड़ रहे हैं इस गिरोह के तार
अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई तक जाने में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि Omaxe Residency Lucknow में पकड़ा गया यह गिरोह शहर में पहले पकड़े गए कुछ और बड़े कॉल सेंटर्स से जुड़ा हो सकता है। पुलिस इस मामले को कुछ समय पहले लखनऊ की ही मशहूर समिट बिल्डिंग में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर के केस से जोड़कर भी देख रही है। पकड़े गए सभी आठों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनके लैपटॉप व मोबाइल से डेटा रिकवर किया जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि अब तक कितने करोड़ रुपये का लेन-देन हो चुका है।
पॉश इलाकों और सुरक्षित मानी जाने वाली हाई-राइज सोसाइटीज में इस तरह की अवैध गतिविधियां होना वाकई चिंता का विषय है। Omaxe Residency Lucknow की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब सीधे-सादे तौर-तरीकों को छोड़कर डिजिटल ठगी के लिए नए-नए ठिकाने ढूंढ रहे हैं। ऐसे में हम सभी को भी सतर्क रहने की जरूरत है ताकि किसी भी तरह के ऑनलाइन फ्रॉड से बचा जा सके।







