Nepal Floods Alert: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा की खबरों के बाद अब भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता काफी बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले और बिहार से सटे सीमावर्ती गांवों में लोग लगातार डर के साए में रातें बिता रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि रात भर में पानी लोगों के घरों के भीतर तक नहीं पहुंचा, जिससे सुबह ग्रामीणों ने थोड़ी राहत की सांस ली। फिर भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है और नेपाल से छोड़े जाने वाले पानी पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
जलभराव से ठप हुआ आवागमन और दैनिक जीवन
कुशीनगर और बिहार को जोड़ने वाले शिवपुर, बसंतपुर और मरचहवा जैसे गांवों के हालात इस समय काफी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। भारी बारिश के कारण स्थानीय नदियां और छोटे-नाले उफान पर आ चुके हैं, जिससे सड़कों पर कई फीट पानी भर गया है। रास्तों पर जलभराव की वजह से छोटी गाड़ियों का चलना पूरी तरह बंद हो चुका है और लोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए केवल ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा ले रहे हैं। बहुत से ग्रामीणों को मजबूरी में अपने जूते और चप्पल हाथों में लेकर पानी भरे रास्तों से पैदल गुजरना पड़ रहा है।
प्रशासनिक अलर्ट और लाउडस्पीकर से चेतावनी
नेपाल से लगातार पानी छोड़े जाने की सूचनाओं के बीच स्थानीय प्रशासन ने भी अपनी तरफ से सतर्कता बढ़ा दी है। प्रशासन की ओर से आसपास के इलाकों में लाउडस्पीकर के जरिए घोषणाएं कराई जा रही हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपना जरूरी सामान और मवेशियों को समय रहते ऊंचे स्थानों पर पहुंचा दें। हालांकि, कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें प्रशासन की तरफ से सीधे तौर पर कोई स्पष्ट संदेश या मदद अभी तक गांव में आकर नहीं दी गई है।

सीएम योगी ने दिए कड़े निर्देश
बाढ़ ने खासकर बिहार के 6 जिलों और यूपी के 4 जिलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी तक पहुंचने और वहां जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज होने के बाद बिहार और यूपी सरकार ने गंडक और नारायणी नदी से जुड़े जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है। सीएम योगी भी ने चिंता जताई है। उन्होंने कुशीनगर और महराजगंज में गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि और बाढ़ की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतने और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
महराजगंज, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर और आसपास के नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। योगी प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर और तटवर्ती इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है। निचले इलाकों में पानी बढ़ने की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों से सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की अपील की गई है। हालांकि फिलहाल सिद्धार्थनगर में बाढ़ का खतरा नहीं बताया जा रहा है, लेकिन नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद प्रशासन किसी भी स्थिति को लेकर पूरी तरह अलर्ट है। इसके अलावा बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है।
नेपाल में तबाही और ग्लेशियल झील का खतरा
नेपाल में अचानक आई इस आपदा के पीछे ग्लेशियल झील फटने (GLOF) की आशंका जताई जा रही है। नेपाल-चीन सीमा के पास त्रिशूली और भोटेकोशी जैसी नदियों के जलस्तर में अचानक बहुत तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भोटेकोशी नदी में आए फ्लैश फ्लड की वजह से कम से कम 157 लोगों की जान चली गई है और सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। यह हादसा एक हिमस्खलन के कारण नदी के बहाव में रुकावट आने से हुआ, जिसके बाद बिना किसी पूर्व चेतावनी के पानी का तेज बहाव नीचे के इलाकों की तरफ फैल गया।
NDRF की तैनाती और भारत की तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए भारत के सेंट्रल वॉटर कमीशन ने उत्तर प्रदेश और बिहार के संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। गंडक नदी में पानी का बहाव नीचे की तरफ बढ़ने की आशंका को देखते हुए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की 20 टीमों को दोनों राज्यों में तैनात किया गया है। इनमें से 11 टीमें उत्तर प्रदेश और 9 टीमें बिहार में पूरी तरह हाई अलर्ट पर रखी गई हैं। सीमावर्ती गांवों में प्रशासन और ग्रामीण दोनों ही लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति का समय रहते सामना किया जा सके।
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