Navratri 2026: मां सिद्धिदात्री की पूजा से होती है साधना पूर्ण, पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

Navratri 2026

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Navratri 2026: सोमवार को शारदीय नवरात्रि (Sharad Navratri) का नौवां और अंतिम दिन है, इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवमी की तिथि का अत्यंत पावन और विशेष महत्व माना गया है, जिसे साधना की सिद्धि और आत्म-उन्नति का शिखर माना जाता है। इस पावन अवसर पर कई परंपराओं में कन्या पूजन, पवित्र हवन और विविध अनुष्ठानों का विधान है। माँ सिद्धिदात्री का भव्य स्वरूप हमें ज्ञान, असीम सकारात्मक ऊर्जा, साधना की पूर्णता और परम सिद्धि का दिशा-निर्देश प्रदान करता है।

नवरात्र के अंतिम दिन पीएम मोदी ने की मां सिद्धिदात्री की स्तुति

शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संस्कृत श्लोक साझा कर देवी दुर्गा का स्मरण किया। उन्होंने लिखा- यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते। ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः।। जो श्रद्धालु पूरे श्रद्धा-भाव से भगवती का ध्यान करते हैं, उनका कल्याण और उत्थान निश्चित है। हे देवेश्वरी! जो भी आपका निरन्तर स्मरण करता है, आप उसके समस्त कष्टों और विपत्तियों का निवारण करती हैं, इसमें कोई संशय नहीं। यह पंक्तियाँ दुर्गा कवच के आठवें श्लोक का सार हैं, जो माँ दुर्गा के स्मरण की शक्ति और उनकी रक्षात्मक महिमा को दर्शाती हैं।

मां सिद्धिदात्री अष्ट सिद्धियों और परम ज्ञान की देवी

–नाम का तात्पर्य: ‘सिद्धि’ का तात्पर्य आध्यात्मिक व भौतिक पूर्णता से है और ‘दात्री’ का अर्थ देने वाली, यानी जो भक्तों को सिद्धि प्रदान करती हैं।

– नवरात्र की तिथि: नवरात्र के अंतिम और नौवें दिन मां दुर्गा के इस नौवें स्वरूप ‘मां सिद्धिदात्री’ की आराधना की जाती है।

– अष्ट सिद्धियों की दात्री: देवी अपने साधकों को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशत्व और वशित्व नामक आठों सिद्धियां प्रदान करती हैं।

– देवी का स्वरूप: कमल के आसन पर विराजमान मां सिद्धिदात्री की चार भुजाओं में चक्र, गदा, शंख व कमल सुशोभित हैं।

–दिव्य ज्ञान का प्रतीक: इनका यह पावन स्वरूप परम शक्ति, सिद्धियों की प्राप्ति और अलौकिक दिव्य ज्ञान का प्रतीक है।

– अर्धनारीश्वर का संबंध: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही समस्त सिद्धियां प्राप्त की थीं।

– शिव-शक्ति का संतुलन: देवी की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर शक्ति का हुआ, जिससे वे संसार में ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए।

– प्रिय भोग व अर्पण: मां को हलवा, पूरी, खीर, काले चने, मौसमी फल और लाल या नीले रंग के फूल विशेष रूप से कमल अति प्रिय हैं।

–कन्या पूजन का महत्व: महानवमी तिथि पर कन्या पूजन करना और उन्हें प्रसाद भेंट करना अत्यंत शुभ व फलदायी माना जाता है।

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