Table of Contents
- नेशनल हाईवे टोल प्लाजा से मुक्ति: एक नए युग की शुरुआत
- क्या है मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग (MLFF) व्यवस्था?
- मई से यहाँ हटेगा पहला टोल बैरियर: शुरुआत गुजरात से
- कैसे काम करेगी गेंट्री तकनीक और ANPR कैमरा?
- तकनीकी खराबी या बैलेंस न होने पर कटेगा ‘दोगुना’ ई-चालान
- फास्टैग से फ्री फ्लो तक: भारतीय सड़कों का बदलता स्वरूप
- निष्कर्ष: समय और ईंधन की बचत की दिशा में बड़ा कदम
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
National Highway Toll Plaza पर अब नहीं लगेंगी लंबी कतारें, हटने वाले हैं सभी बैरियर; NHAI लागू करेगा ‘फ्री फ्लो’ सिस्टम
नई दिल्ली/सूरत: नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ा खुलासा हुआ है। हाईवे पर सफर के दौरान अब आपको National Highway Toll Plaza पर रुकने और घंटों कतार में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने टोल प्लाजा को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में अपना ‘मास्टरप्लान’ तैयार कर लिया है। सरकार अब फास्टैग (FASTag) की मौजूदा व्यवस्था से एक कदम आगे बढ़कर ‘मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग’ (MLFF) सिस्टम लागू करने जा रही है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद हाईवे पर लगे भारी-भरकम टोल बैरियर इतिहास बन जाएंगे। एनएचएआई (NHAI) का लक्ष्य अगले तीन वर्षों के भीतर देशभर के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को टोल प्लाजा मुक्त बनाना है। इसकी शुरुआत अगले महीने यानी मई 2026 से गुजरात के सूरत से होने जा रही है।
क्या है मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग (MLFF) व्यवस्था?
मौजूदा व्यवस्था में फास्टैग होने के बावजूद वाहनों को टोल प्लाजा पर कुछ सेकंड या मिनट के लिए रुकना पड़ता है। बैरियर खुलने और सेंसर द्वारा टैग रीड करने में जो समय लगता है, उससे व्यस्त समय में लंबी कतारें लग जाती हैं। लेकिन ‘मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग’ एक ऐसी तकनीक है जिसमें वाहन को अपनी गति कम करने या रुकने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होगी।
इस व्यवस्था में सड़क के ऊपर एक लोहे का ढांचा (Gantry) लगाया जाता है, जिस पर आधुनिक सेंसर और कैमरे लगे होते हैं। जैसे ही आपका वाहन इस गेंट्री के नीचे से गुजरेगा, सिस्टम अपने आप आपके फास्टैग या नंबर प्लेट से टोल की राशि काट लेगा। यानी अब 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हुए भी आपका टोल भुगतान हो जाएगा।

मई से यहाँ हटेगा पहला टोल बैरियर: शुरुआत गुजरात से
सरकार ने इस आधुनिक व्यवस्था के पायलट प्रोजेक्ट और रोलआउट के लिए तारीखें तय कर ली हैं। National Highway Toll Plaza मुक्त करने की इस मुहिम की पहली झलक मई में गुजरात के सूरत स्थित चौर्यासी में देखने को मिलेगी। यहाँ से टोल प्लाजा को पहले ही हटाया जा चुका है और नई मशीनें इंस्टॉल की जा रही हैं।
सूरत के बाद अगला नंबर हरियाणा का होगा। यहाँ दिल्ली-चंडीगढ़ रूट पर स्थित एनएच-44 के घरौंदा टोल प्लाजा पर इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इन दो बड़े केंद्रों पर सफलता मिलने के बाद अगले 36 महीनों के भीतर पूरे भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों को इस आधुनिक तकनीक से लैस कर दिया जाएगा।
कैसे काम करेगी गेंट्री तकनीक और ANPR कैमरा?
National Highway Toll Plaza के टोल बैरियर हटने के बाद सड़क पर ऊँची गेंट्री लगाई जाएगी। इसमें दो मुख्य तकनीकों का संगम होगा:
- ANPR (Automatic Number Plate Recognition): यह कैमरा वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करेगा।
- RFID Reader: यह वाहन पर लगे फास्टैग को रीड करेगा।
ये दोनों सिस्टम मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि टोल राशि सही वाहन के खाते से कटे। यदि फास्टैग में कोई समस्या आती है, तो नंबर प्लेट के आधार पर वाहन के मालिक के बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से भुगतान काट लिया जाएगा। इससे मानवीय हस्तक्षेप शून्य हो जाएगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी खत्म होगी।
तकनीकी खराबी या बैलेंस न होने पर कटेगा ‘दोगुना’ ई-चालान
अक्सर टोल प्लाजा पर विवाद तब होता है जब फास्टैग में बैलेंस नहीं होता या मशीन उसे रीड नहीं कर पाती। नई व्यवस्था में इस समस्या का समाधान ‘ई-चालान’ के रूप में निकाला गया है। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी वाहन के फास्टैग में तकनीकी कमी होगी या उसमें पर्याप्त धनराशि नहीं होगी, तो वाहन को रोका नहीं जाएगा।
इसके बजाय, संबंधित वाहन का ‘ई-चालान’ जेनरेट होगा, जैसा कि वर्तमान में ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने पर होता है। प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे मामलों में वाहन चालक से दोगुना टोल शुल्क (National Highway Toll Plaza) ई-चालान के माध्यम से वसूला जाएगा। यह राशि सीधे वाहन मालिक के पते पर भेजी जाएगी या उसके डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज कर दी जाएगी, जिसे अगली बार इंश्योरेंस या फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू कराते समय भरना अनिवार्य होगा।
फास्टैग से फ्री फ्लो तक: भारतीय सड़कों का बदलता स्वरूप
पिछले कुछ वर्षों में भारत में टोल वसूली की प्रक्रिया में जबरदस्त बदलाव आया है।
- नकद लेनदेन का अंत: पिछले माह ही सरकार ने टोल पर कैश कलेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया है।
- फास्टैग की सफलता: फास्टैग ने टोल पर रुकने का समय काफी कम किया और पारदर्शिता बढ़ाई।
- डिजिटल क्रांति: अब फास्टैग से आगे बढ़कर बिना रुके टोलिंग की व्यवस्था भारत को अमेरिका और यूरोप के विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।
समय और फ्यूल की बचत की दिशा में बड़ा कदम
National Highway Toll Plaza को हटाकर फ्री फ्लो टोलिंग लागू करना केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद है। लंबी कतारें न लगने से ईंधन की भारी बचत होगी और लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी आएगी, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। मई से शुरू होने वाली यह व्यवस्था आने वाले समय में भारतीय राजमार्गों पर सफर का अनुभव पूरी तरह बदल देगी।







