Modi Cabinet Decisions: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण को लेकर कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई गई है। सरकार ने देश के सात सबसे व्यस्त रेलवे कॉरिडोर को फोर-लेन यानी चार पटरियों वाला बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इस बड़े कदम से न केवल यात्री ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी, बल्कि माल ढुलाई की गति में भी काफी सुधार देखने को मिलेगा।
सात हाई डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को चार-लेन बनाने की तैयारी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पिछले 12 सालों से भारतीय रेलवे के कायाकल्प और आधुनिकीकरण पर लगातार काम चल रहा है। इसी कड़ी में अब 7 हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-लेन और फोर-ट्रैक बनाने की योजना को विस्तार दिया जा रहा है। इसके साथ ही कई अन्य ऐसे कॉरिडोर पर भी तेजी से काम किया जा रहा है, जहां आने वाले वर्षों में ट्रेनों का ट्रैफिक काफी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है।
इन सातों हाई-डेंसिटी नेटवर्क प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य सबसे ज्यादा दबाव वाले रेल मार्गों पर जाम और ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या को खत्म करना है। फिलहाल करीब 4,000 किलोमीटर के कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की जा रही है।
गोल्डन क्वाड्रिलैटरल और व्यस्त रेल मार्गों की वर्तमान स्थिति
देश में कुल 11,000 किलोमीटर के ऐसे हाई-डेंसिटी कॉरिडोर हैं, जिन पर भारतीय रेलवे का लगभग 40 प्रतिशत ट्रैफिक चलता है। इनमें दिल्ली-कोलकाता, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई और मुंबई-चेन्नई जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं जो मिलकर देश का ‘गोल्डन क्वाड्रिलैटरल’ बनाते हैं। इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-कोलकाता और दिल्ली-गुवाहाटी के डायगोनल रूट भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
रेल मंत्री के अनुसार, इन सातों प्रमुख कॉरिडोर में से लगभग 2,000 किलोमीटर का फोर-लेन काम पहले ही पूरा हो चुका है। करीब 5,000 किलोमीटर लंबे हिस्से पर काम या तो चल रहा है या उसे स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं बाकी 4,000 किलोमीटर के खंडों को अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया चल रही है। इस पूरे प्लान से व्यस्त रेल मार्गों की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।
5 राज्यों में बढ़ेगा नेटवर्क, 56 लाख लोगों को मिलेगा लाभ
कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से देश के 5 राज्यों—पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़—को सीधा लाभ होगा। इन राज्यों के 14 जिलों में भारतीय रेलवे का नेटवर्क लगभग 656 किलोमीटर तक बढ़ जाएगा।
इस विस्तार से करीब 4,790 गांवों के 56 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। दूर-दराज के इलाकों का बड़े शहरों से जुड़ाव आसान होने से स्थानीय स्तर पर व्यापार, रोजगार और स्वरोजगार के नए मौके पैदा होंगे। खासकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आदिवासी और औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का यह विकास काफी अहम माना जा रहा है।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक यात्रा होगी और आसान
रेल नेटवर्क के इस विस्तार से आम यात्रियों के साथ-साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी। नई पटरियां बिछने से कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे प्रमुख तीर्थस्थलों और प्राकृतिक पर्यटन केंद्रों तक पहुंचना पहले से कहीं ज्यादा सुगम हो जाएगा।
इन परियोजनाओं के पूरे होने से तारातारिणी मंदिर, झारसुगुड़ा का जगन्नाथ मंदिर, रतनपुर महामाया मंदिर, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक और ज्वालेश्वर धाम जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों का सफर आसान होगा। इसके साथ ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अचनकमार टाइगर रिजर्व और खुटाघाट बांध जैसे प्रमुख प्राकृतिक एवं वन्यजीव पर्यटन क्षेत्रों तक भी पर्यटकों की आवाजाही को गति मिलेगी।







