Middle East Crisis: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है, अमेरिका ने ईरान पर किया हमला

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पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है

अंतरराष्ट्रीय गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है और स्थिति काफी नाजुक मोड़ पर पहुंच चुकी है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसी संवेदनशील जगह से गुजर रहे पनामा के झंडे वाले एक तेल टैंकर ‘एम/टी किकु’ पर सुबह अचानक एकतरफा ड्रोन हमला कर दिया गया। इस टैंकर में दो मिलियन बैरल से भी ज्यादा कच्चा तेल मौजूद था। अमेरिकी प्रशासन ने इस पूरी हरकत के पीछे सीधे तौर पर ईरान का हाथ होने का दावा किया है। इस घटना ने ग्लोबल ट्रेड रूट की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

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सीजफायर (Ceasefire) के बावजूद अमेरिका का दूसरा बड़ा हमला

इस उकसावे वाली कार्रवाई के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने राष्ट्रपति के आदेश पर तुरंत एक्शन लिया। दो सप्ताह पहले हुए सीजफायर (Ceasefire) के बावजूद अमेरिका का दूसरा बड़ा हमला ईरान के सैन्य ठिकानों पर हुआ है. अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने दक्षिणी ईरान के सिरिक द्वीप और क़ेश्म द्वीप के पास स्थित ईरान के मिसाइल गोदामों, ड्रोन स्टोरेज ठिकानों और तटीय रडार स्टेशनों को अपना निशाना बनाया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि उन्होंने ईरान को शांति समझौते का पालन करने का पूरा मौका दिया था।

लेकिन जब उनकी तरफ से दोबारा ड्रोन दागे गए, तो यह जवाबी कार्रवाई जरूरी हो गई थी। स्थानीय मीडिया ने भी इन इलाकों में तेज धमाकों की पुष्टि की है।

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डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की नई चेतावनी

इस बड़े सैन्य एक्शन के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की नई चेतावनी भी सामने आ गई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सीधे तौर पर ईरान को आड़े हाथों लिया। ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में लिखा कि अगर ईरान ने अपनी इन हरकतों और शांति समझौते के बार-बार उल्लंघन को तुरंत बंद नहीं किया, तो अमेरिका इससे भी कहीं ज्यादा बड़ी और घातक सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगली बार अमेरिकी कार्रवाई इतनी सख्त हो सकती है कि जिससे ईरान का वजूद ही संकट में आ जाए।

देखा जाए तो महज दो हफ्ते पहले बड़ी मुश्किल से तैयार हुआ शांति और युद्धविराम समझौता अब पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर है। लगातार दूसरे दिन हुए इन अमेरिकी हमलों और दोनों देशों के आक्रामक बयानों ने मिडिल ईस्ट को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। तेल टैंकरों पर होने वाले ये हमले न केवल व्यापारिक नजरिए से खतरनाक हैं, बल्कि यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं। अब यह देखना बेहद अहम होगा कि ईरान इस अमेरिकी कार्रवाई और ट्रंप की खुली चेतावनी का क्या जवाब देता है।

यह भी पढ़ें: Mann Ki Baat: PM Modi ने बताया कैसे रक्षा क्षेत्र से लेकर योग तक दुनिया में बढ़ रही है भारत की ताकत

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