Aliganj Fire Case: सुप्रीम कोर्ट सख्त, LDA वीसी को अवमानना का नोटिस और SIT रिपोर्ट तलब | DD News Uttar Pradesh

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Aliganj Fire Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow के Aliganj स्थित एक कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के मामले में देश की सबसे बड़ी अदालत ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार को अवमानना (Contempt of Court) का नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का कड़ा निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान अदालत में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने LDA की लापरवाही पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने यह नोटिस उन रिहायशी इमारतों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के पुराने अदालती आदेशों का पालन न करने के आरोप में जारी किया है, जिनका इस्तेमाल अवैध रूप से व्यावसायिक या गैर-रिहायशी कामों के लिए किया जा रहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने LDA उपाध्यक्ष से सवाल किया कि कोर्ट के स्पष्ट आदेशों की अनदेखी करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए? इसके अलावा, पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) को अपनी जांच रिपोर्ट अगली सुनवाई पर सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

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2016 में ध्वस्तीकरण का आदेश, फिर क्यों टली कार्रवाई?

कोर्ट में एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य रखे। उन्होंने बताया कि जिस इमारत में यह दुखद अग्निकांड हुआ, उसे गिराने का आदेश एलडीए ने 10 मई 2016 को ही पास कर दिया था।

लेकिन इसके बावजूद, 5 जुलाई 2016 को प्राधिकरण ने तकनीकी आधार का हवाला देते हुए अपने ही आदेश को वापस ले लिया। इसके बाद सालों तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। नतीजा यह हुआ कि जून 2026 में इस इमारत में भयानक आग लग गई और 15 मासूम छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हादसे के बाद भले ही इमारत को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन अदालत ने टिप्पणी की कि अगर यही कार्रवाई समय रहते हो जाती तो इन बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।

सार्वजनिक सुरक्षा और नियमों का पालन जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मास्टर प्लान में तय भूमि उपयोग का सरेआम उल्लंघन हुआ, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। अदालत ने कहा कि यह सिर्फ लखनऊ का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की सभी राज्य राजधानियों में भूमि उपयोग के नियमों और सार्वजनिक सुरक्षा को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

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