Lakhimpur-Kheri पुलिस मालखाना प्रकरण: 19 साल पुराने जेवर गायब होने के मामले में पुलिस ने लगाई फाइनल रिपोर्ट

Lakhimpur-Kheri

Share This Article

Lakhimpur-Kheri: उत्तर प्रदेश के Lakhimpur-Kheri से एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जो इन दिनों हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। अमूमन हम सब अपनी कीमती चीज़ों की सुरक्षा के लिए पुलिस पर भरोसा करते हैं, लेकिन जब पुलिस के अपने मालखाने से ही जनता का माल गायब हो जाए और उसकी फाइल बंद करने के लिए बंदरों का बहाना बनाया जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है। यह पूरा मामला साल 2007 से जुड़ा है, जिसे अब पुलिस ने कागज़ी तौर पर बंद कर दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पूरे मामले में अब तक क्या-क्या हुआ।

क्या है पूरा मामला?

यह कहानी शुरू होती है 10 नवंबर 2007 को, जब कपूरथला मोहल्ले की रहने वाली आभा रानी अग्रवाल उर्फ जूली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस मामले में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और उनके पति मुदित अग्रवाल को जेल जाना पड़ा। पोस्टमार्टम और पंचनामा की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मृतका के शरीर से मिले सोने के गहने ज़ब्त किए थे। इन गहनों में एक सोने की चेन, नाक की लौंग, अंगूठी और 10 चूड़ियाँ शामिल थीं। इन सभी कीमती सामानों को सुरक्षा के लिहाज से कोतवाली के मालखाने में जमा करा दिया गया था।

बंदरों पर मढ़ा गया था दोष

समय बीतने और मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, मुदित अग्रवाल ने अपनी पत्नी के जेवर वापस पाने के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया। साल 2024 में जब जिला जज की अदालत ने पुलिस से इस पर जवाब मांगा, तो पुलिस की तरफ से जो दलील दी गई, उसने सबको हैरान कर दिया। पुलिस ने अदालत को बताया कि मालखाने की कुछ पोटलियाँ छत पर सुखाई जा रही थीं, तभी बारिश आ गई और इसी बीच बंदरों ने एक पोटली को खुर्द-बुर्द यानी गायब कर दिया। अदालत ने इस कहानी को पूरी तरह खारिज करते हुए कड़ी फटकार लगाई और ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के आदेश दिए।

पुलिस मालखाना जांच में खुला राज

अदालत के सख्त आदेश के बाद 28 मई 2025 को कोतवाली में केस दर्ज कर पुलिस मालखाना जांच शुरू की गई। एएसपी पवन गौतम की देखरेख में हुई इस जांच में जब पुराने रिकॉर्ड और चार्ज ट्रांसफर की फाइलों को खंगाला गया, तो असली कहानी सामने आई। पता चला कि साल 2008 में तत्कालीन मालखाना इंचार्ज एसआई ऊदल सिंह ने हेड मोहर्रिर चंद्रिका प्रसाद को चार्ज दिया था। इसके बाद चार्ज रामबक्श पाल के पास गया। लेकिन जब बाद में हेड मोहर्रिर संजय सिंह ने ज़िम्मेदारी संभाली, तब तक वह जेवरों वाली पोटली रिकॉर्ड से गायब हो चुकी थी।

यह भी पधिएँ:  Lucknow Airport : लखनऊ एयरपोर्ट पर घटेगी उड़ानों की संख्या: हवाई सफर करने से पहले पढ़ लें यह जरूरी खबर

अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर केस हुआ बंद

लंबी छानबीन के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुँची कि गहने गायब होने का मामला चंद्रिका प्रसाद और रामबक्श पाल के कार्यकाल के दौरान का ही है। लेकिन पेंच यह फंसा कि ये दोनों कर्मचारी काफी समय पहले ही पुलिस विभाग से रिटायर हो चुके थे और वर्तमान में उन दोनों की मृत्यु भी हो चुकी है। चूंकि आरोपी अब इस दुनिया में नहीं हैं, इसलिए पुलिस ने कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के बजाय अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल (क्लोजर रिपोर्ट) कर दी है और मामला बंद हो गया है।

भले ही पुलिस ने अपनी फाइल पर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी हो, लेकिन पीड़ित मुदित अग्रवाल का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। उनका कहना है कि उन्हें न तो अपनी पत्नी के जेवर मिले और न ही उसके नुकसान का कोई मुआवज़ा मिला। वहीं उनके वकील शैलेंद्र सिंह गौड़ का भी मानना है कि ज़िम्मेदार पुलिसकर्मियों की मौत हो जाने से सरकार या विभाग की जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती। पीड़ित पक्ष अब इस जांच रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Are you human? Please solve:Captcha


Live Channel

Advertisement

[wonderplugin_slider id=1]

Live Poll

[democracy id="2"]

Also Read This