IRCTC घोटाला: लालू परिवार ने चुनाव प्रचार के बीच ट्रायल स्थगित करने की मांग की

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बिहार विधानसभा चुनाव के बीच लालू परिवार के लिए कानूनी और राजनीतिक दबाव दोनों बढ़ गए हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रहे बहुचर्चित IRCTC घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा पुत्र तेजस्वी यादव ने अदालत से निवेदन किया है कि चुनाव प्रचार के दौरान रोजाना ट्रायल को कुछ सप्ताह के लिए स्थगित किया जाए। परिवार का तर्क है कि चुनाव के दौरान वे पूरी तरह से जनसभाओं और प्रचार में व्यस्त हैं और अदालत में रोजाना उपस्थिति बनाए रखना उनके लिए अत्यंत कठिन है। वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने अदालत में बताया कि 18 हजार पन्नों की चार्जशीट को पढ़ना और तैयार होना समयसाध्य है, जबकि अदालत का आदेश केवल 250 पन्नों का अध्ययन करने का था।

मनिंदर सिंह ने अदालत को यह भी बताया कि लालू परिवार पर पहले से चार अलग-अलग आपराधिक मामलों में रोजाना सुनवाई चल रही है। ऐसे में एक ही वकील टीम के लिए सभी मामलों की तैयारी करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया में जल्दबाजी से बचाव पक्ष को नुकसान हो सकता है। वहीं, सीबीआई ने इस मांग का विरोध किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में तेजी से ट्रायल करने का निर्देश दे चुका है। एजेंसी का कहना है कि इस मामले में और विलंब न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ होगा। अदालत ने सीबीआई से कहा कि वह लालू परिवार की अर्जी पर जल्द जवाब दाखिल करे।

IRCTC घोटाला मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। सीबीआई के मुताबिक इस दौरान रांची और पुरी के दो IRCTC होटलों को निजी कंपनी सुजाता होटल्स को अनुचित तरीके से लीज पर दिया गया था। इसके बदले में लालू परिवार को मूल्यवान जमीन और शेयर कम कीमतों पर मिले। सीबीआई ने इसे सत्ता के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का उदाहरण बताया, जबकि लालू परिवार का कहना है कि यह मामला राजनीतिक साजिश से प्रेरित है। अदालत ने 13 अक्टूबर को लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप तय किए थे।

राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह मामला संवेदनशील है। तेजस्वी यादव बिहार में महागठबंधन का चेहरा हैं और चुनाव प्रचार में पूरी तरह व्यस्त हैं। रोजाना कोर्ट ट्रायल का दबाव उनके चुनावी अभियान पर असर डाल सकता है। राजद का तर्क है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का मतलब चुनाव में हस्तक्षेप नहीं था। पार्टी नेताओं का कहना है कि ट्रायल के साथ-साथ चुनाव प्रचार चलाना असंभव है और उन्हें उचित राहत दी जानी चाहिए।

अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अदालत अब सीबीआई के जवाब के बाद फैसला करेगी कि लालू परिवार को कुछ राहत दी जाएगी या रोजाना ट्रायल जारी रहेगा। इस मामले में न्याय और राजनीति दोनों मोर्चों पर लालू परिवार का संघर्ष जनता और मीडिया के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। बिहार विधानसभा चुनाव और IRCTC घोटाला केस का यह संगम राजनीतिक रणनीति और कानूनी दांव-पेंच का प्रत्यक्ष उदाहरण पेश कर रहा है।

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