रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया बैठक ने India और Russia के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दी है। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय और समझौते किए गए हैं, जिनका भारत और रूस के रिश्तों पर गहरा असर पड़ेगा।
1. एनर्जी क्षेत्र में सहयोग
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कच्चा तेल और गैस सप्लाई: रूस ने ऐलान किया कि वह भारत को कच्चा तेल, नैचुरल गैस, रिफाइनिंग पेट्रोकेमिकल और न्यूक्लियर क्षेत्र में सप्लाई जारी रखेगा। इसका मतलब यह है कि पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग पहले से भी अधिक बढ़ सकता है।
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भारत की निर्भरता: इस सहयोग से भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रख सकेगा, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
2. न्यूक्लियर ऊर्जा में सहयोग
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सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में सहयोग: भारत में जहां अधिकांश बिजली कोयले से बनाई जाती है, वहीं अब भारत छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर प्लांट्स लगाना चाहता है। रूस की मदद से भारत 2047 तक 100 गीगावाट बिजली छोटे न्यूक्लियर रिएक्टरों से उत्पन्न करने का लक्ष्य रखता है।
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रूस की तकनीकी श्रेष्ठता: इस तकनीक में रूस का अग्रणी स्थान है और यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
3. दोनों देशों के व्यापार में वृद्धि
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100 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य: भारत और रूस के बीच आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 5.8 लाख करोड़ रुपये का है, जिसमें भारत को भारी घाटा हो रहा है। भारत, रूस से 5 लाख 39 हजार करोड़ रुपये का सामान खरीदते हैं जबकि उसे सिर्फ 41 हजार करोड़ रुपये का सामान बेचते हैं।
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रुपये और रूबल में व्यापार: भारत और रूस के बीच अधिक से अधिक व्यापार भारत की करेंसी रुपये और रूस की करेंसी रूबल में होगा. अभी दोनों देशों के बीच 96 फीसदी व्यापार रुपये-रूबल में हो रहा है।
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4. रूस में भारतीय कामगारों के लिए अवसर
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कामकाजी अवसर: इसी मुलाकात में ये भी ऐलान हुआ है कि रूस अपने देश में भारत के लोगों को काम करने के नए मौके देगा. रूस क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा देश है लेकिन उसकी आबादी सिर्फ 15 करोड़ है और अब वहां कामगारों का बड़ा संकट खड़ा हो गया है और यही वजह है कि रूस को भारतीय कामगारों की जरूरत है. आज रूस एक साल में भारत के 10 लाख लोगों को भी नौकरी देने के लिए तैयार है
5. सैन्य सहयोग और हथियार निर्माण
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हथियार निर्माण में साझेदारी: अब भारत, रूस से सिर्फ हथियार नहीं खरीदेगा बल्कि दोनों देश साथ मिलकर इन हथियारों का निर्माण भी करेंगे और भारत मेक इन इंडिया के तहत रिसर्च एंड डेवलपमेंट, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर जोर देगा।
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मिसाइलों की तकनीकी साझेदारी: जैसे ब्रह्मोस मिसाइल की साझेदारी, दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक में और सहयोग होगा।
6. स्पेस सेक्टर में सहयोग
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अंतरिक्ष मिशन में साझेदारी: भारत और रूस के बीच स्पेस सेक्टर को लेकर भी समझौता हुआ है, जिसके तहत दोनों देश अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने के मिशन पर साथ काम करेंगे और नेविगेशन, डीप स्पेस और रॉकेट इंजन के विकास में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा. राष्ट्रपति पुतिन ने ये भी वादा किया है कि वो संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट देने का समर्थन करते हैं और रूस साल 2026 में भारत को ब्रिक्स की अध्यक्षता देने का भी समर्थन कर रहा है।
7. आतंकवाद के खिलाफ सहयोग
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आतंकी फंडिंग पर रोक: आतंकवाद के खिलाफ भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी है और राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि वो आतंकी फंडिंग को रोकने और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत के साथ मिल कर काम करेंगे।
8. इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर
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सप्लाई चेन में सुधार: आखिरी फैसला ये हुआ है कि भारत और रूस के बीच इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाया जाएगा और ये वो रास्ता होगा, जहां से दोनों देश समय और पैसे की बचत करके एक दूसरे के साथ व्यापार कर सकेंगे। ये कॉरिडोर मुम्बई को ईरान के चाबहार पोर्ट से जोड़ेगा। इसके बाद चाबहार पोर्ट से सड़क के रास्ते ये ईरान के उत्तरी छोर पर पहुंचेगा और वहां से समुद्र के रास्ते ये रूस को इस कॉरिडोर से जोड़ेगा
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समय की बचत: इस मार्ग से 30-35 दिनों में होने वाली यात्रा 20-25 दिनों में संपन्न होगी, जिससे व्यापार में गति आएगी।







