Gujarat ATS की बड़ी कार्रवाई: देश की सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। गुजरात में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी कामयाबी मिली है, जिससे एक बड़ा खतरा टल गया है। पाकिस्तानी आतंकी संगठन के नेटवर्क के खिलाफ चल रही जांच में पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले हैं, जो सीधे सीमा पार बैठे उनके आकाओं तक जाते हैं। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और सुरक्षा एजेंसियों ने किस तरह इस नेटवर्क को नेस्तनाबूद किया है।
Gujarat ATS का पूरा ऑपरेशन
इस पूरे ऑपरेशन को गुजरात एटीएस (Gujarat ATS) ने अंजाम दिया है। कुछ दिनों पहले एटीएस (ATS) ने आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। उनसे जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो पांच और लोगों के नाम सामने आए। इसके बाद बिना वक्त गंवाए एटीएस (ATS) की टीम ने पाटन जिले की सिद्धपुर तहसील के खडियाल गांव में छापेमारी कर इन पांचों को भी धर दबोचा।
पकड़े गए नए आरोपियों की पहचान बिलाल आबिदभाई शेरा, मोहम्मद अयूब कादीवाला, मोहम्मद पालनपुरी उर्फ खली अयूब कादीवाला, मोहम्मद पालनपुरी उर्फ खली अयूब सुनसारा, शाफिया रईस मुख्ती और मोहम्मद हसन कारडिया के रूप में हुई है। एटीएस ने इन सभी को मेहसाणा की कडी कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 24 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है ताकि इनसे गहराई से पूछताछ की जा सके।
जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed)
जांच में यह बात साफ हो गई है कि पकड़े गए सभी 13 संदिग्धों का संबंध सीधे तौर पर पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से है। ये आरोपी पिछले छह महीने से लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब फॉरेंसिक टीम (forensic team ) ने तीन आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (मोबाइल और लैपटॉप) की जांच की। इस जांच से पता चला कि ये लोग सीधे पाकिस्तान के बहावलपुर में स्थित जैश के मुख्यालय से जुड़े हुए थे। वहां बैठे बड़े आतंकी सरगना इन्हें ऑनलाइन माध्यमों से निर्देश दे रहे थे। दरअसल, पिछले कुछ समय में भारतीय सेना द्वारा सीमा पार आतंकियों को मिले करारे झटके के बाद ये संगठन खुद को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश में जुटे हैं और यह मॉड्यूल उसी कोशिश का हिस्सा था।
आतंकी साजिश
पकड़े गए आरोपियों के इरादे कितने खतरनाक थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे गुजरात में एक बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे। सरकारी वकील पी.आर. दंतानी ने कोर्ट को बताया कि इन आरोपियों में से कुछ ने गुजरात के ही सुनसान इलाकों में टाइम बम बनाने का प्रयास किया था।
हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने करीब 6 से 7 बार सुनसान जगहों पर ले जाकर ट्रायल ब्लास्ट भी किए। हालांकि, वे एक पूरी तरह काम करने वाला टाइम बम बनाने में बार-बार फेल हो रहे थे, लेकिन उनकी कोशिशें लगातार जारी थीं। अगर गुजरात एटीएस ने सही समय पर इन्हें नहीं दबोचा होता, तो ये किसी बड़ी और अप्रिय वारदात को अंजाम दे सकते थे। फिलहाल पुलिस इनके पास से भारी मात्रा में जिहादी और उर्दू साहित्य के साथ-साथ विस्फोटक सामग्री बरामद करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में इस जांच से कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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