Gorakhpur Triple Murder: गोरखपुर के बांसगांव इलाके से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों को तार-तार कर दिया है। यहां के बलुआ गांव में महज 16 साल के किशोर ने अपने ही परिवार के तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया। रविवार की देर रात जब पूरा घर गहरी नींद में सोया हुआ था, तब इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके के लोग सन्न हैं और गांव में मातम पसरा हुआ है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह पूरी कहानी आपसी मनमुटाव और घर के भीतर पनप रही नफरत से जुड़ी है। दरअसल, आरोपी किशोर के मन में काफी समय से यह बात बैठ गई थी कि उसके पिता बड़े भाई को ज्यादा तवज्जो देते हैं। पिता हरिलाल गुप्ता घर के बाहर किराना और अंडे की दुकान चलाते हैं। पहले इस दुकान को आरोपी किशोर ही संभालता था, लेकिन करीब एक साल पहले जब उसका बड़ा भाई अमित गुप्ता कोलकाता से वापस लौटा, तो पिता ने दुकान की जिम्मेदारी अमित को सौंप दी।
पिता चाहते थे कि छोटा बेटा अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, जबकि किशोर खुद का कारोबार शुरू करने के लिए पैसों की मांग कर रहा था। इसी बात को लेकर घर में आए दिन तनाव रहने लगा और किशोर के मन में अपने भाई के प्रति गुस्सा बढ़ता चला गया।

रात के अंधेरे में खौफनाक साजिश
रविवार की रात को भी सब कुछ सामान्य दिख रहा था। अमित अपनी पत्नी रंजना, तीन साल के बेटे रेयान और गोद ली हुई बेटी रुबिका के साथ कमरे में सो रहे थे। गर्मी ज्यादा होने की वजह से कमरे का दरवाजा खुला हुआ था।
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी किशोर देर रात तक अपने मोबाइल पर लगा रहा और सबके सोने का इंतजार करता रहा। जब रात के करीब ढाई बजे सब गहरी नींद में चले गए, तब वह लोहे की रॉड, हसिया और बांका लेकर उनके कमरे में दाखिल हुआ। उसने सबसे पहले सोते हुए अमित के सिर पर रॉड से हमला किया और फिर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार कर दिए। हलचल होने पर रंजना और मासूम रेयान की आंखें खुलीं, तो आरोपी ने उन पर भी हमला कर दिया। तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

गोद ली बेटी ने सूझबूझ से बचाई जान
जब यह खूनी खेल चल रहा था, तब कमरे में सो रही रुबिका की भी नींद खुल गई। आरोपी ने उसे भी अपना निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन वह किसी तरह अपनी जान बचाकर कमरे से बाहर भागने में कामयाब रही। रुबिका भागकर सीधे अपने दादा हरिलाल के पास पहुंची और चीख-चीखकर उन्हें पूरी बात बताई। इसके बाद रात के करीब तीन बजे हरिलाल ने तुरंत डायल-112 पर कॉल करके पुलिस को इस भयानक हादसे की सूचना दी।
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मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम
सूचना मिलते ही बांसगांव थाना पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी डॉक्टर कौस्तुभ और एसपी दक्षिणी दिनेश कुमार पुरी भी फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। जब पुलिस ने पूरे घर की छानबीन शुरू की, तो आरोपी किशोर घर की छत पर ही छिपा हुआ मिला। पुलिस ने उसे तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया और उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई रॉड, हसिया और बांका भी बरामद कर लिया है। पुलिस फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
पारिवारिक कलह और आपस में बातचीत की कमी कभी-कभी कितना भयानक रूप ले सकती है, यह घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है। महज एक दुकान के विवाद और गलतफहमी ने हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया। आज के समय में बच्चों के बदलते व्यवहार और उनके मन में पनप रहे गुस्से पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि ऐसे हादसों को वक्त रहते रोका जा सके।

