Foot Swelling : बार-बार पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज, हार्ट-किडनी समेत इन गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत

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Foot Swelling : आजकल की व्यस्त लाइफस्टाइल में दिनभर खड़े होकर काम करना हो या घंटों ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर बिताना, शाम होते-होते पैरों में हल्की सूजन आना काफी आम बात हो गई है। कई बार ज्यादा नमक खाने या फिर प्रेग्नेंसी के दौरान भी पैर फूल जाते हैं, जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक भी हो जाते हैं। लेकिन, अगर आपको ‘पैरों में बार-बार सूजन’ की शिकायत रहती है और यह लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह आपके शरीर के अंदर पनप रही किसी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।

किन बीमारियों की वजह से आ सकती है सूजन?

मेडिकल एक्सपर्ट्स और स्वास्थ्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर पैरों में लगातार सूजन बनी रहे, तो इसके पीछे कई बड़े स्वास्थ्य कारण हो सकते हैं।

  • हार्ट फेलियर की समस्या: जब दिल शरीर में सही तरीके से खून को पंप नहीं कर पाता, तो खून और पानी पैरों तथा टखनों में जमा होने लगता है, जिससे सूजन दिखने लगती है।

  • किडनी की बीमारी: किडनी का काम शरीर से एक्स्ट्रा पानी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालना होता है। जब यह ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में पानी और सोडियम जमा होने लगता है।

  • लिवर की समस्या: लिवर की बीमारी होने पर शरीर में प्रोटीन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे लिक्विड पैरों के टिश्यूज में इकट्ठा होने लगता है।

  • नसों की खराबी या ब्लड क्लॉट: नसों में खून का बहाव सही न होने पर (वेनस इनसफिशिएंसी) भी पैर सूज जाते हैं। वहीं, अगर केवल एक पैर में अचानक तेज सूजन, दर्द या लालपन आए, तो यह नसों में खून का थक्का (Blood Clot) जमने का संकेत हो सकता है।

सही वजह जानने के लिए डॉक्टर कौन-सी जांच करवाते हैं?

जब आप इस समस्या को लेकर डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वे केवल शारीरिक जांच ही नहीं करते, बल्कि अंदरूनी कारण को पकड़ने के लिए कुछ खास टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।

सामान्यतः स्थिति के आधार पर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट, ईसीजी (ECG), इकोकार्डियोग्राफी (Echo) या फिर पैरों की नसों का डॉपलर अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। इन जांचों से सही वजह का पता चलता है और समय पर सही इलाज शुरू हो पाता है।

राहत पाने के लिए रोज़ाना क्या करें?

अगर सूजन बहुत ज्यादा गंभीर नहीं है या शुरुआती स्तर पर है, तो आप अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे बदलाव करके राहत पा सकते हैं।

जब भी समय मिले, बैठते या लेटते वक्त पैरों के नीचे एक-दो तकिए रखकर उन्हें दिल के स्तर से थोड़ा ऊंचा उठाएं। घंटों एक ही जगह खड़े या बैठे रहने से बचें और बीच-बीच में हल्का टहलें। अपने खाने में नमक की मात्रा सीमित रखें, भरपूर पानी पिएं और हमेशा आरामदायक जूते पहनें।

पैरों में कभी-कभार होने वाली सूजन तो थकावट से हो सकती है, लेकिन पैरों में बार-बार सूजन आना किसी अंदरूनी बीमारी की ओर इशारा करता है। इसलिए केवल घरेलू नुस्खों के भरोसे बैठने के बजाय सही समय पर डॉक्टर से मिलकर जांच कराना बेहद जरूरी है। अगर सूजन के साथ सांस फूलने या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचे।

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