Dussehra 2026: Nepal के ‘बड़ा दशईं’ से America की रामलीला तक, जानें विदेशों में कैसे मनाया जाता है दशहरा

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Dussehra 2026: भारत की सभ्यता, संस्कृति और परंपराएं सैकड़ों साल पुरानी हैं। यही वजह है कि आज हमारे देश के त्योहार सिर्फ सीमाओं के अंदर ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार विदेशों में भी पूरी धूमधाम के साथ मनाए जाते हैं। खासतौर पर विदेशों में बसने वाले भारतीय अपने हर त्योहार पर अपनी संस्कृति की रौनक जमाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

अभी हाल ही में अमेरिका के मशहूर टाइम्स स्क्वायर (Times Square) पर लोगों द्वारा गरबा करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था, जहां गरबा की धुनों पर विदेशी भी थिरकने को मजबूर हो गए थे। अब देश में नवरात्रि के बाद दशहरा (Dussehra) यानी विजयादशमी का पर्व आ गया है, जो भारत के अलावा दुनिया के कई अन्य देशों में भी बहुत आस्था के साथ मनाया जा रहा है।

Nepal में कैसे मनाया जाता है ‘बड़ा दशईं’ पर्व?

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में दशहरे के पर्व को ‘बड़ा दशईं’ के नाम से जाना जाता है। यहां लोग बहुत ही श्रद्धा के साथ देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं। इस त्योहार की सबसे खास बात यह होती है कि परिवार के बड़े-बुजुर्ग छोटे बच्चों के माथे पर टीका लगाते हैं और उन्हें ‘जमरा’ यानी जौ के अंकुर देकर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। नेपाल में यह पावन त्योहार पूरे 15 दिनों तक चलता है, जिसमें सातवें दिन से मुख्य उत्सव की शुरुआत होती है। इस दौरान वहां सरकारी दफ्तरों में अवकाश रहता है और पूरे देश में जश्न का एक अलग ही माहौल देखने को मिलता है।

बांग्लादेश में भव्य रूप से होती है दुर्गा पूजा (Durga Puja)

बांग्लादेश में रहने वाला हिंदू समुदाय मुख्य रूप से दुर्गा पूजा और विजयादशमी का पर्व बहुत उत्साह से मनाता है। इस दौरान जगह-जगह सुंदर पंडाल सजाए जाते हैं, मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित होती हैं और विजयादशमी के दिन उनका विसर्जन किया जाता है।

बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल पूरे देश में हजारों की संख्या में पूजा मंडप बनाए गए हैं, जिनमें राजधानी ढाका में भी बड़ी संख्या में पंडाल शामिल हैं। इस पावन अवसर पर रमना काली मंदिर, सिद्धेश्वरी काली मंदिर और ढाका यूनिवर्सिटी के जगन्नाथ हॉल जैसे प्रमुख स्थानों पर हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

श्रीलंका में रामयण से जुड़ी परंपराओं की झलक

श्रीलंका में भी हिंदू समुदाय, विशेषकर तमिल समुदाय के लोग मंदिरों में पूजा-पाठ कर नवरात्रि और विजयादशमी मनाते हैं। हालांकि, यहां भारत के उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की तरह बड़े पैमाने पर हर जगह रावण दहन की परंपरा नहीं होती, लेकिन रामायण से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। स्थानीय समुदाय अपनी परंपराओं के अनुसार इस दिन को एक पावन धार्मिक पर्व के रूप में मनाता है, जिससे सांस्कृतिक जुड़ाव बना रहता है।

अमेरिका में भारतीय समुदाय का सांस्कृतिक उल्लास

अमेरिका के इलिनोइस, कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी, टेक्सास, जॉर्जिया, फ्लोरिडा और वाशिंगटन जैसे राज्यों में रहने वाला भारतीय-अमेरिकी समुदाय पारंपरिक प्रार्थनाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मिलन समारोहों के जरिए दशहरा मनाता है। इन आयोजनों के जरिए प्रवासी भारतीय अपनी आने वाली पीढ़ी को देश की संस्कृति और संस्कारों से जोड़े रखते हैं। विदेशों में भी रावण के पुतले जलाए जाते हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को जीवंत रखा जाता है, ताकि दुनिया के किसी भी कोने में रहने पर भी अपनी जड़ों से जुड़ाव हमेशा बना रहे।

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