Darjeeling : दार्जिलिंग की पहाड़ियों, तराई और डुआर्स क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे गोरखा मुद्दे को हल करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सिलीगुड़ी के सुकना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह, क्षेत्रीय गोरखा नेताओं और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र सरकार ने संविधान के दायरे में रहकर गोरखाओं की विशिष्ट पहचान, क्षेत्रीय विकास और स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशने का भरोसा दिया है।
पूर्व उप-NSA पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में समिति गठित
गोरखा समुदाय की मांगों और अधिकारों की रूपरेखा तय करने के लिए केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का ऐलान किया है। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (Deputy NSA) और वार्ताकार पंकज कुमार सिंह करेंगे। यह समिति दार्जिलिंग, तराई और डुआर्स क्षेत्र के सभी प्रमुख हितधारकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श करके एक अंतिम समझौते का मसौदा (Draft Agreement) तैयार करेगी।
संविधान के दायरे में निकलेगा स्थायी हल
बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि गोरखा समाज की सांस्कृतिक पहचान, अधिकार और विकास से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान भारतीय संविधान के दायरे में ही निकाला जाएगा। इस बैठक में दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट, पूर्व राजनयिक एवं राज्यसभा सदस्य हर्षवर्धन श्रृंगला, गोजमुमो (GJM) नेता बिमल गुरुंग और गोरामुमो (GNLF) के अध्यक्ष मन घीसिंग समेत कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे। बैठक के दौरान केंद्र की ओर से इन क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का आश्वासन भी दिया गया है।
अलग राज्य ‘गोरखालैंड’ की मांग पर अडिग है विपक्ष
एक तरफ जहां केंद्र सरकार संवैधानिक ढांचे के तहत बीच का रास्ता तलाशने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ पर्वतीय क्षेत्र की कुछ राजनीतिक पार्टियां अलग ‘गोरखालैंड’ राज्य की मांग पर अडिग हैं। भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (BGPM) के अध्यक्ष अनित थापा ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता अलग राज्य का निर्माण ही है और इससे कम कुछ भी उन्हें स्वीकार्य नहीं होगा। दशकों पुरानी इस मांग को लेकर दार्जिलिंग में पहले भी कई बड़े आंदोलन और हिंसक प्रदर्शन हो चुके हैं।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर (‘चिकन नेक’) की सुरक्षा पर रणनीति
गोरखा मुद्दे के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री ने देश के बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (‘चिकन नेक’) की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की। बैठक के दूसरे दिन सुरक्षा एजेंसियों, बीएसएफ (BSF) और एसएसबी (SSB) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए त्रि-स्तरीय (Triangular Security Grid) सुरक्षा व्यवस्था लागू करने पर गंभीर चर्चा हुई।
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