Cyber Crime : जापानी भाषा सीखकर करते थे ठगी, यूपी पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के 5 आरोपियों को दबोचा

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Cyber Crime : उत्तर प्रदेश की मुगलसराय पुलिस, स्वाट, सर्विलांस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मिलकर एक ऐसे फर्जीवाड़े का खुलासा किया है, जिसके तार भारत से सीधे जापान तक जुड़े हुए थे। जनपद पुलिस ने बुधवार को एक हाईटेक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 5 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

ये आरोपी यूपी में बैठकर जापान के मासूम और बुजुर्ग नागरिकों को अपना निशाना बनाते थे और उनसे लाखों रुपये ऐंठ लेते थे। आइए, आसान शब्दों में समझते हैं कि ये ठग इस पूरे खेल को कैसे अंजाम देते थे और पुलिस ने इन्हें कैसे दबोचा।

जापानी भाषा सीखकर बुजुर्गों को बनाते थे निशाना

एडिशनल एसपी विक्रम दहिया के अनुसार, पुलिस को काफी समय से एक गुप्त इनपुट मिल रहा था। इसके आधार पर बुधवार को कैलाशपुरी स्थित एक बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर छापेमारी की गई। वहां एक संदिग्ध साइबर कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। जब पुलिस अंदर घुसी तो कई कंप्यूटरों पर लाइव कॉल्स चल रही थीं और आरोपी विदेशी भाषा में बात कर रहे थे।

पूछताछ में एक हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने बिहार के नालंदा और गया में रहकर बाकायदा जापानी भाषा सीखी थी। इसके बाद वे वीओआईपी (VOIP) कॉलिंग के जरिए जापान के लोगों से संपर्क करते थे और खुद को कंप्यूटर या बैंक का टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताते थे।

रिमोट एक्सेस और फर्जी पिन से खाली कर देते थे बैंक खाते

ठगों का काम करने का तरीका बेहद शातिर था:

  • तकनीकी खराबी का झांसा: आरोपी पीड़ितों को डराते थे कि उनके कंप्यूटर में कोई बड़ी तकनीकी खराबी आ गई है।

  • रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर: इसके बाद वे पीड़ितों को अपने सिस्टम में रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने और 6 अंकों का पिन डालने को कहते थे।

  • बैंकिंग क्रेडेंशियल की चोरी: जैसे ही उन्हें कंप्यूटर का कंट्रोल मिलता, वे पीड़ितों से इंटरनेट बैंकिंग ऐप में लॉग-इन करवाते और सारी बैंकिंग डिटेल्स अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स में शेयर कर देते थे। इसके बाद खातों से पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लिए जाते थे।

9 लाख रुपये फ्रीज, भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के दो बैंक खातों में जमा करीब 9 लाख रुपये की रकम को तुरंत फ्रीज करवा दिया है।

मौके से पुलिस ने 19 मॉनिटर, 20 सीपीयू, 3 लैपटॉप, 6 मोबाइल फोन, कई नेटवर्किंग राउटर और अन्य सामान बरामद किए हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रौनक सिंह, रौशन कुमार, अमन कुमार, अंकित कुमार और विकास वैभव शामिल हैं। रौनक सिंह इस फर्जी कॉल सेंटर का मैनेजर बताया जा रहा है, जबकि मुख्य सरगना रेड से ठीक पहले फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है।

यह भी पढ़ें: Amroha Case: 8 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले farmaan को उम्रकैद, bulldozer action

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