18th BRICS Summit: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर वैश्विक आर्थिक सहयोग को एक नया आयाम मिला है। इस शिखर सम्मेलन के तहत आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम (Brics business forum) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने सदस्य देशों से आपस में व्यापारिक रुकावटों को कम करने, युवा स्टार्टअप्स को एक-दूसरे के बाजारों में अवसर देने और कारोबारी साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज समय आ गया है कि ब्रिक्स की सामूहिक क्षमता को दुनिया भर की समस्याओं का समाधान खोजने में लगाया जाए और आर्थिक विकास की गति को और तेज किया जाए।
ब्रिक्स का 20 साल का सफर और बढ़ती आर्थिक क्षमता
अपने भाषण की शुरुआत में पीएम मोदी ने याद दिलाया कि इस वर्ष ब्रिक्स अपने गठन के 20 साल पूरे कर रहा है। साल 2006 में जब इस समूह की शुरुआत हुई थी, तब इसमें सिर्फ चार देश शामिल थे। लेकिन आज ब्रिक्स और इसके साझेदार देशों को मिलाकर यह 21 राष्ट्रों का एक बड़ा परिवार बन चुका है।
आंकड़ों के जरिए समूह की अहमियत को समझाते हुए उन्होंने कहा कि आज ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग 50 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा, वैश्विक जीडीपी में इस समूह की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत और कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 25 प्रतिशत से अधिक है। पिछले दो दशकों में जहां वैश्विक जीडीपी लगभग ढाई गुना बढ़ी है, वहीं ब्रिक्स देशों की संयुक्त जीडीपी में साढ़े चार गुना की वृद्धि हुई है। इसका अर्थ यह है कि ब्रिक्स की अर्थव्यवस्था दुनिया की तुलना में करीब दोगुनी रफ्तार से आगे बढ़ रही है।
भारत की अध्यक्षता की थीम और आर्थिक रणनीति
PM Modi ने बताया कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की मुख्य थीम ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएन्स, इनोवेशन, को-ऑपरेशन एंड सस्टेनिबिलिटी’ रखी गई है। पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत ने अपनी व्यापारिक और आर्थिक नीतियों को इसी विचार के इर्द-गिर्द बुना है।
भारत ने ऊर्जा से लेकर आधुनिक तकनीक तक, अपनी सप्लाई चेन को अधिक मजबूत, विविधतापूर्ण और भरोसेमंद बनाया है। यही कारण है कि दुनिया भर में जारी आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत स्थिर और तेज गति से विकास कर रहा है। देश में सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों का जाल तेजी से बिछाया जा रहा है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, बायोटेक, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और शिप-बिल्डिंग जैसे नए और रणनीतिक क्षेत्रों में क्षमताएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने दुनिया भर के निवेशकों को “मेक इन इंडिया, इनोवेट विद इंडिया और स्केल फॉर द वर्ल्ड” का संदेश दिया।
स्टार्टअप्स, डिजिटल क्रांति और यूपीआई का उदाहरण
PM Modi के ब्रिक्स भाषण में भारत के उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम का विशेष उल्लेख किया गया। उन्होंने बताया कि भारत में आज दो लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप्स और 120 से ज्यादा यूनिकॉर्न काम कर रहे हैं, जो देश को वैश्विक समाधानों के केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
भारतीय स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े बदलाव ला रहे हैं। इसके साथ-साथ ग्रीन हाइड्रोजन, एडवांस बैटरी टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में भी नए प्रयोग हो रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि अब आवश्यकता इस बात की है कि ब्रिक्स मंच का उपयोग करके इन नवाचारों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया जाए।
भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे का जिक्र करते हुए उन्होंने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की सफलता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यूपीआई बड़े पैमाने पर वित्तीय समावेशन का एक बड़ा माध्यम बना है और आज दुनिया के करीब 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल भुगतान अकेले इसी तकनीक के माध्यम से पूरे होते हैं।
व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए तीन बड़े लक्ष्य
आज जहां विश्व स्तर पर व्यापारिक पाबंदियां और बाधाएं बढ़ रही हैं, वहीं भारत आर्थिक संबंधों को जोड़ने वाले पुल का काम कर रहा है। साल 2014 के बाद से भारत ने करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। ब्रिक्स देशों के बीच भी भारत का यही रुख है कि व्यापारिक नियमों को सरल बनाया जाए और कारोबारियों को नए अवसर दिए जाएं।
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच से ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के सामने तीन बहुत स्पष्ट और व्यावहारिक लक्ष्य रखे:
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शीर्ष 10 व्यापार बाधाओं की पहचान: काउंसिल एक ऐसी रिपोर्ट तैयार करे जो ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में आने वाली सबसे बड़ी 10 रुकावटों को चिन्हित करे और उन्हें हटाने के उपाय बताए।
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100 स्टार्टअप्स को समर्थन: हर साल कम से कम 100 ब्रिक्स स्टार्टअप्स को अन्य सदस्य देशों के बाजारों में अपने काम का विस्तार करने के लिए मदद दी जाए।
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1,000 नई कारोबारी साझेदारियां: हर वर्ष ब्रिक्स देशों की कंपनियों और व्यवसायियों के बीच कम से कम 1,000 नई व्यावसायिक साझेदारियां बनाने का लक्ष्य तय किया जाए।
PM Modi ने सुझाव दिया कि हर साल इन तीनों लक्ष्यों पर हुई प्रगति की नियमित समीक्षा भी की जानी चाहिए।
सुरक्षित समुद्री मार्ग और महिला उद्यमियों की भूमिका
वैश्विक व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए सीमाओं और रास्तों की सुरक्षा को बेहद जरूरी बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार तभी फल-फूल सकता है जब समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें, सप्लाई चेन बिना रुकावट चलती रहे और समुद्र में काम करने वाले नाविक सुरक्षित हों। भारत हमेशा से ही नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) का समर्थन करता रहा है।
इसके अलावा, उन्होंने ‘ब्रिक्स वुमन्स बिजनेस अलायंस’ की सराहना करते हुए कहा कि महिला उद्यमियों को आर्थिक प्रगति की इस यात्रा का नेतृत्व करना चाहिए। नई दिल्ली में आयोजित इस अलायंस की बैठक में करीब 200 महिला व्यावसायिक नेताओं ने हिस्सा लिया, जो एक सकारात्मक संदेश है।
अंत में, PM Modi ने आह्वान किया कि ब्रिक्स को अपनी महत्वाकांक्षाओं को ठोस फैसलों में और अपनी सामूहिक ताकत को दुनिया के कल्याण के लिए समाधानों में बदलना होगा। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का यह संदेश स्पष्ट है कि आपसी सहयोग, पारदर्शी नीतियों और नवाचार के दम पर ब्रिक्स न केवल खुद आगे बढ़ेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।







