BRICS Bazaar New Delhi: ईरानी राष्ट्रपति की बेटी Zahra Pezeshkian पहुंचीं ब्रिक्स बाजार, हस्तशिल्प और कला का लिया जायजा

BRICS Bazaar New Delhi, Zahra Pezeshkian

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BRICS Bazaar New Delhi: नई दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स आयोजनों के बीच एक खूबसूरत सांस्कृतिक झलक देखने को मिली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन (Masoud Pezeshkian) की बेटी जहरा पेजेश्कियन (Zahra Pezeshkian) और उनके पति हसन मजीदी (Hasan Majidi) ने शनिवार को ब्रिक्स बाजार का दौरा किया। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों की कला, शिल्प और ब्रिक्स सांस्कृतिक धरोहर को करीब से देखा और कारीगरों के हुनर की सराहना की।

भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पवेलियन का भ्रमण

इस खास दौरे के दौरान जहरा पेजेश्कियन भारत दौरा के तहत उनके साथ केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी उपस्थित रहीं। उन्होंने विभिन्न देशों के पवेलियन का भ्रमण किया, जिसमें भारतीय पवेलियन भी शामिल था।

दौरे के दौरान उन्होंने स्टॉल्स पर मौजूद शिल्पकारों और कारीगरों से सीधे बातचीत की। ब्रिक्स बाजार नई दिल्ली सदस्य और सहयोगी देशों के कलाकारों, डिजाइनरों और क्रिएटिव उद्यमियों को एक मंच पर लाने का एक जरिया बना है। यहां आने वाले लोगों को असली हस्तशिल्प, हथकरघा, टेक्सटाइल और पारंपरिक कलाकृतियों को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है।

ईरानी कढ़ाई और बलोची कला की खूबसूरती

इस आयोजन में भाग लेने वाले देशों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करने के साथ-साथ ईरानी कला के दो विशेष स्टॉल भी लगाए गए हैं। इनमें से एक स्टॉल पर बलोची कढ़ाई को प्रदर्शित किया गया है, जिसे नादिया करीमी ने लगाया है।

बलोची कढ़ाई, जिसे स्थानीय भाषा में “दोच” यानी सिलाई या सुई का काम कहा जाता है, एक प्राचीन और बारीक हाथ की सिलाई वाली कला है। इसे बलूचिस्तान क्षेत्र की महिलाएं तैयार करती हैं। नादिया करीमी ने इस परंपरा को आधुनिक डिजाइनों के साथ जोड़कर नया रूप दिया है। उन्होंने हाल ही में ‘तारन’ नाम का एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड शुरू किया है, जो ईरानी कला और उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का काम करता है।

रश्ती कढ़ाई और पारंपरिक शीशे का काम

ईरान के दूसरे स्टॉल पर आमनेह सेदिघी ने रश्ती कढ़ाई (जिसे रश्ती-दूजी भी कहा जाता है) और शीशे के काम (आईनेह-दूजी) की सुंदर कलाकृतियां पेश की हैं। रश्त क्षेत्र के इस पारंपरिक सुई के काम को आधुनिक रोजमर्रा के उत्पादों, जैसे कपड़े, जूते और सैंडल में ढाला गया है।

इस तरह की कोशिशों से जहां एक तरफ पारंपरिक कलात्मक विरासत बनी रहती है, वहीं दूसरी तरफ आम लोग इसे आज के दौर में इस्तेमाल भी कर पाते हैं। जहरा पेजेश्कियन के इस दौरे ने ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक समझ और संबंधों को और मजबूत बनाने का काम किया है।

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