Azamgarh Madarsa Fraud Case:उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मदरसों के नाम पर चल रहे बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस और स्पेशल जांच एजेंसियों ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन गिरफ्तारियों में से दो आरोपियों पर सरकारी धन के गबन का आरोप है, जबकि तीसरे पर फर्जी कागजातों के सहारे मदरसा चलाने का मामला दर्ज है।

EOW की जांच में हुआ सरकारी धन के गबन का खुलासा
पहला मामला सरकारी बजट के दुरुपयोग से जुड़ा है। राज्य विशेष अपराध अनुसंधान शाखा (EOW) लखनऊ की जांच में सामने आया कि मदरसा प्रबंधक रियाज अहमद ने ₹66,000 के राजकीय धन का गबन किया था। इस आजमगढ़ मदरसा घोटाला मामले में आरोपी शरद यादव और धर्मेंद्र कुमार यादव काफी समय से फरार चल रहे थे। पुलिस ने घेराबंदी कर इन दोनों को अंबारी चौराहे के पास से धर दबोचा। इन दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले से ही दो मुकदमे दर्ज हैं।

Azamgarh में फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर चल रहा था मदरसा
दूसरा मामला सिधारी थाना क्षेत्र का है, जो कि पूरी तरह फर्जी मदरसा संचालित करने से जुड़ा है। दरअसल, आजमगढ़ के मदरसा पोर्टल पर रजिस्टर्ड मदरसों के सत्यापन और जांच के दौरान बड़ी संख्या में अनियमितताएं पाई गई थीं। इसी जांच के आधार पर पुलिस ने मदरसा इस्लामिया मोहम्मदिया के प्रबंधक मोहम्मद अकरम को मुंडा तिराहे से गिरफ्तार किया है। अकरम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मदरसा चलाने का आरोप है और उसके खिलाफ रानी की सराय थाने में मुकदमा दर्ज था।

EOW जांच और विशेष एजेंसियों की इस कार्रवाई से साफ है कि शिक्षा के नाम पर सरकारी धन की लूट करने वालों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया है, जहां से उन्हें जेल भेजा जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के अन्य संदिग्ध मदरसा संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
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