Artificial Sweeteners : आर्टिफिशियल स्वीटनर्स सेहत के लिए कितने सही? कैम्ब्रिज की स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

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Artificial Sweeteners : आजकल वजन घटाने या डायबिटीज से बचने के लिए बहुत से लोग शुगर-फ्री मिठाइयां, डाइट ड्रिंक्स और कम कैलोरी वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगे हैं। हमें लगता है कि ये विकल्प हमारी सेहत के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं। लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस धारणा को चुनौती दे दी है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक स्टडी बताती है कि ये आर्टिफिशियल स्वीटनर्स हमारी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पर काफी बुरा असर डाल सकते हैं।

हमारी आंतों में मौजूद बैक्टीरिया क्यों हैं जरूरी?

हमारी आंतों में करोड़ों सूक्ष्मजीव होते हैं, जिन्हें मिलाकर ‘गट माइक्रोबायोम’ कहा जाता है। ये बैक्टीरिया सिर्फ हमारा खाना पचाने का काम ही नहीं करते, बल्कि ये शरीर का ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रखने, पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाने और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत रखने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। अगर इन बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाए, तो इंसान कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ सकता है।

लैब टेस्ट में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने लैब में 25 अलग-अलग तरह के आंतों के बैक्टीरिया विकसित किए और उन्हें 39 तरह के स्वीटनर्स के संपर्क में रखा। हैरान करने वाली बात यह रही कि लगभग 75% स्वीटनर्स ने कम से कम एक तरह के अच्छे बैक्टीरिया की ग्रोथ को धीमा या प्रभावित कर दिया। जब इन स्वीटनर्स को कैफीन या कुछ आम दवाओं के साथ मिलाकर टेस्ट किया गया, तो इनका बुरा असर और ज्यादा देखने को मिला।

दवाइयों और स्वीटनर का घातक कॉम्बिनेशन

स्टडी में सबसे चौंकाने वाला कॉम्बिनेशन आइसोस्टेवियोल (एक तरह का स्वीटनर) और डुलोक्सेटीन (एंटीडिप्रेसेंट दवा) का पाया गया। जब ये दोनों एक साथ मिले, तो इन्होंने रोजबुरिया और पैराबैक्टेरॉइड्स जैसे जरूरी बैक्टीरिया की ग्रोथ को पूरी तरह रोक दिया। रिसर्च की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सोनजा ब्लाशे का कहना है कि लोग मानते हैं कि स्वीटनर शरीर से बिना नुकसान पहुंचाए निकल जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। यह गट माइक्रोबायोम की विविधता को कम कर देते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि चूंकि यह रिसर्च अभी लैब में की गई है, इसलिए इंसानों पर इसके सीधे असर को समझने के लिए और अध्ययन की जरूरत है। लेकिन फिर भी, हमें बिना सोचे-समझे बहुत ज्यादा आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, ताकि हमारी आंतों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।

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