Kanpur में राज्यपाल Anandiben Patel ने किया क्राफ्ट प्रदर्शनी का उद्घाटन, शिल्पकारों को मिलेगा बाजार

Kanpur, Anandiben Patel

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Kanpur: अगर आपको पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और देश के अलग-अलग कोनों से आए शिल्पकारों की चीजें पसंद हैं, तो आपके लिए एक बहुत अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) ने हाल ही में कानपुर नगर के चुन्नीगंज कन्वेंशन सेंटर में एक विशेष क्राफ्ट प्रदर्शनी (craft exibition) का उद्घाटन किया है। क्राफ्टरूट्स (craft roots) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में देश भर के कारीगरों ने अपने स्टाल लगाए हैं। आइए जानते हैं इस आयोजन से जुड़ी खास बातें।

देश भर के शिल्पकारों की कला का अनूठा संगम

इस प्रदर्शनी में आपको देश के विभिन्न हिस्सों की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प देखने को मिलेंगे। राज्यपाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ऐसी प्रदर्शनियों से लोगों को बेहतरीन उत्पाद खरीदने का मौका तो मिलता ही है, साथ ही हमारे पारंपरिक कारीगरों को भी आर्थिक मजबूती मिलती है। देश के दूर-दराज इलाकों से कारीगर अपनी कला को लेकर यहां पहुंचते हैं और उनके हर सामान के पीछे पीढ़ियों की मेहनत जुड़ी होती है।

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कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि पारंपरिक हुनर को रोजगार से जोड़ना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि किसी जरूरतमंद कारीगर परिवार की मदद करना बहुत बड़ा पुण्य है। समाज को इन मेहनती लोगों के श्रम का सही मूल्य मिलना चाहिए ताकि वे आगे बढ़ सकें। सरकार की योजनाओं के तहत इन्हें 50 हजार से लेकर 5 से 10 लाख रुपये तक के ऋण और अन्य सहायता दिलाने की बात भी कही गई है।

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आंगनवाड़ी बच्चों के लिए खास संदेश

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आंगनवाड़ी के बच्चों को लेकर एक बहुत ही प्यारी बात कही। उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से कहा कि वे अपने गोद लिए आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए इन शिल्पकारों से 5 से 10 जोड़ी हाथ से बने परिधान खरीदें। इससे बच्चों को कार्यक्रमों के लिए किराए के कपड़े नहीं पहनने पड़ेंगे और हमारे स्थानीय कारीगरों को भी लगातार काम मिलता रहेगा।+

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विश्वविद्यालयों में अनुभवी शिल्पियों को मिले जगह

राज्यपाल ने यह भी सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों में अनुभवी शिल्पियों को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में जोड़ा जाना चाहिए। इससे युवा और विद्यार्थी सीधे इन पारंपरिक कलाकारों से डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता की व्यावहारिक बातें सीख सकेंगे। नई पीढ़ी यानी जेन-जी को भी हमारी इन पारंपरिक कलाओं को अपनाकर इन्हें आगे बढ़ाना चाहिए।

यह भी पढ़ें: Lucknow में CM Yogi ने किया ‘साधना श्रृंखला-2026’ का उद्घाटन | Sadhana Shrankhla-2026

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