Akshaya Tritiya: आज देशभर में अक्षय तृतीया का पावन पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भारतीय परंपरा में इस दिन को नई शुरुआत और कीमती धातुओं की खरीदारी के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस साल की खास बात यह है कि सोने और चांदी की कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर होने के बावजूद, बाजार में ग्राहकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार कुल कारोबार 20,000 करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर सकता है।
कीमतों में उछाल पर भारी पड़ा विश्वास
पिछले एक साल के भीतर सोने और चांदी की कीमतों में जो तेजी आई है, उसने सबको हैरान कर दिया है। जहाँ पिछले साल Akshaya Tritiya पर सोने की कीमत करीब 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 1.58 लाख रुपये तक पहुंच गई है। चांदी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है, जो 85,000 रुपये से सीधे 2.55 लाख रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है। इतनी भारी कीमतों के बाद भी लोग शगुन के तौर पर खरीदारी करना नहीं भूल रहे हैं, जिससे पिछले साल के 16,000 करोड़ के मुकाबले इस बार व्यापार मूल्य में बड़ा उछाल दिख रहा है।
खरीदारी के ट्रेंड में आया बड़ा बदलाव
महंगाई के चलते इस बार Akshaya Tritiya पर ग्राहकों की पसंद और खरीदारी के तरीके में बदलाव देखा जा रहा है। लोग अब भारी हार या गहनों के बजाय हल्के वजन वाली ज्वेलरी और डेली वियर आइटम्स को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। चांदी और डायमंड ज्वेलरी की मांग भी काफी बढ़ी है। इसके अलावा, जो लोग गहने नहीं पहनना चाहते, वे छोटे वजन के सिक्कों में निवेश कर रहे हैं। Akshaya Tritiya के मौके पर ज्वेलर्स भी ग्राहकों को लुभाने के लिए मेकिंग चार्जेस में भारी छूट और फ्री कॉइंस जैसे ऑफर दे रहे हैं।
डिजिटल गोल्ड और निवेश के नए रास्ते
आजकल फिजिकल गोल्ड के साथ-साथ डिजिटल निवेश का चलन भी बढ़ गया है। बहुत से युवा अब Akshaya Tritiya पर दुकान जाने के बजाय घर बैठे डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और गोल्ड ETF में पैसा लगाना सुरक्षित और आसान समझ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि हालांकि ऊंचे दाम की वजह से सोने की मात्रा (Volume) में थोड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन कुल टर्नओवर के मामले में यह साल पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगा।
Akshaya Tritiya का यह त्यौहार भारतीय अर्थव्यवस्था और सर्राफा बाजार के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। ऊंचाइयों को छूती कीमतों के बीच भी 20,000 करोड़ रुपये का अनुमानित कारोबार यह दर्शाता है कि भारतीयों का सोने के प्रति लगाव और इस दिन की धार्मिक महत्ता आज भी उतनी ही मजबूत है। चाहे वह छोटा सा सिक्का हो या डिजिटल निवेश, शुभ मुहूर्त में निवेश की यह परंपरा भविष्य के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार तैयार करती है।
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