बनाया AI बेस्ड पालना, बुलंदशहर के छात्र आदित्य कुमार का अनोखा नवाचार

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आज के आधुनिक समय में जब माता-पिता दोनों नौकरीपेशा होते हैं, तब नवजात शिशु की देखभाल करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। खासतौर पर छोटे शहरों और मध्यमवर्गीय परिवारों में, जहां संसाधन सीमित होते हैं, वहां यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। इसी चुनौती को अवसर में बदलने का सराहनीय प्रयास उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के एक होनहार छात्र ने किया है। शिवचरण इंटर कॉलेज में 12वीं कक्षा के साइंस स्ट्रीम के छात्र आदित्य कुमार ने कम उम्र में बड़ी सोच का परिचय देते हुए AI तकनीक से लैस एक स्मार्ट पालना तैयार किया है, जो नवजात शिशु की जरूरतों को समझकर माता-पिता को हर पल उससे जोड़े रखता है।

12वीं में पढ़ाई करने वाले आदित्य कुमार का यह नवाचार न केवल तकनीकी दृष्टि से उन्नत है, बल्कि समाज की एक वास्तविक जरूरत का व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत करता है। यह AI पालना बच्चे के रोने, हिलने-डुलने और गीला होने जैसी गतिविधियों पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है और मोबाइल के माध्यम से माता-पिता को अलर्ट भेजता है। इससे माता-पिता घर से दूर रहते हुए भी बच्चे की स्थिति पर नजर रख सकते हैं और समय रहते आवश्यक कदम उठा सकते हैं।

यह स्मार्ट पालना देखने में एक सामान्य पालने जैसा ही है, लेकिन इसके अंदर आधुनिक तकनीक छिपी हुई है। आदित्य ने इसमें प्रोग्रामिंग चिप, विभिन्न सेंसर और एक कैमरा लगाया है। इसके बाद पूरे सिस्टम को मोबाइल से कनेक्ट किया गया है। AI सॉफ्टवेयर के जरिए पालने को नियंत्रित किया जाता है। जैसे ही बच्चा रोता है, सेंसर सक्रिय होकर मोबाइल पर “बेबी क्राइंग” का अलर्ट भेज देता है। माता-पिता मोबाइल स्क्रीन पर बच्चे की तस्वीर भी देख सकते हैं। खास बात यह है कि दूर बैठे-बैठे ही पालने को झुलाने का विकल्प मौजूद है। एक क्लिक करते ही पालना अपने-आप झूलने लगता है, जिससे बच्चा शांत हो जाता है।

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इस पालने में लोरी सुनाने के लिए स्पीकर भी लगाए गए हैं, जो बच्चे को सुलाने में मदद करते हैं। इसके अलावा, बच्चे के टॉयलेट करने की स्थिति में भी मोबाइल पर तुरंत अलर्ट आ जाता है, जिससे साफ-सफाई में देरी नहीं होती। आदित्य बताते हैं कि इस पूरे सिस्टम को बनाने में लगभग 3,000 रुपये का खर्च आया है, जो इसे आम लोगों के लिए भी किफायती बनाता है।

आदित्य के अनुसार, उन्हें इस तरह का स्मार्ट पालना बनाने का विचार करीब दो साल पहले आया था। लगातार प्रयास, शिक्षकों के मार्गदर्शन और दोस्तों की आर्थिक मदद से अब यह विचार साकार हो पाया है। इससे पहले भी आदित्य AI रोबोट टीचर जैसा नवाचार कर चुके हैं, जो उनकी तकनीकी रुचि और नवाचार क्षमता को दर्शाता है। अब वे अपने AI पालने का पेटेंट कराने की तैयारी में हैं, ताकि भविष्य में इसे बड़े स्तर पर विकसित किया जा सके।

कम उम्र में इस तरह का नवाचार कर आदित्य कुमार ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी उम्र या माध्यम की मोहताज नहीं होती। उनका यह प्रयास न केवल कामकाजी माता-पिता के लिए उपयोगी है, बल्कि देश के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

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