अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति और सड़क सुरक्षा का संगम: राजघाट से मेरठ तक की भव्य ‘अवेयरनेस राइड’

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नई दिल्ली/मेरठ। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी के राजघाट से लेकर मेरठ के मास्टर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (MSM) तक एक अनूठी और प्रेरणादायक ‘वुमेंस डे सेलिब्रेशन राइड’ का आयोजन किया गया। इस राइड का उद्देश्य केवल जश्न मनाना नहीं, बल्कि सड़कों पर महिलाओं के सम्मान, उनकी सुरक्षा और जिम्मेदार ड्राइविंग के प्रति समाज को जागरूक करना था।

इस विशेष अभियान का सफल आयोजन MSM मेरठ ने एड्यूएक्स मेरठ, इन्फॉर्मेटिक्स रेटिंग्स और एस.पी.ओ.डब्ल्यू.ए.सी (S.P.O.W.A.C) के सहयोग से किया। यह आयोजन न केवल क्षेत्रीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय रहा क्योंकि इसमें सात समुंदर पार से आए राइडर्स ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

राजघाट से मेरठ तक गूँजा सुरक्षा का संदेश

राइड का आगाज़ सुबह 6:30 बजे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट से हरी झंडी दिखाकर किया गया। बाइकर्स का यह विशाल काफिला दिल्ली की सड़कों से होता हुआ मेरठ के लोहिया नगर स्थित एमएसएम परिसर पहुँचा। इस पूरी यात्रा के दौरान राइडर्स ने हेलमेट पहनने, यातायात नियमों का पालन करने और ‘सुरक्षित सड़कें-सुरक्षित भारत’ का नारा बुलंद किया।

अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और राइडर क्लब: इस राइड की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता थी। इसमें न केवल दिल्ली-एनसीआर के युवा शामिल थे, बल्कि नेपाल और कनाडा जैसे देशों के अंतरराष्ट्रीय राइडर्स ने भी हिस्सा लेकर महिला सशक्तिकरण के संदेश को वैश्विक पहचान दी। कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रमुख क्लबों की सक्रिय भागीदारी रही:

  • काफिरा राइडरज़ (Kafira Riderz)

  • हंटर राइडर्स क्लब (Hunter Riders Club)

  • सुरक्षा व्यवस्था: पूरे मार्ग पर सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी ‘काफिरा मार्शल्स स्क्वाड’ ने बखूबी संभाली।

समापन समारोह: यातायात नियमों के प्रति शून्य सहनशीलता

मेरठ पहुँचने पर राइड का भव्य स्वागत किया गया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. महेंद्र पाल सिंह (IPS), कमांडेंट, 5वीं बटालियन यूपीएसएसएफ (UPSSF) उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया:

  1. कठोर नियम पालन: उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अनमोल जीवन की रक्षा के लिए होना चाहिए।

  2. महिलाओं की भूमिका: उन्होंने समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के बढ़ते कदमों की सराहना की।

एस.पी.ओ.डब्ल्यू.ए.सी की अध्यक्षा श्रीमती लक्ष्मी कृष्णन ने महिला सशक्तिकरण और उनकी सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब एक महिला सुरक्षित महसूस करती है, तब समाज स्वतः ही प्रगति करता है।

सामाजिक जागरूकता के लिए समर्पित नेतृत्व

इस पूरी राइड का कुशल नेतृत्व ए.आर.ई.आर.जी (A.R.E.R.G) के सीईओ एंथनी देशुजा ने किया। श्री देशुजा लंबे समय से सामाजिक सरोकारों और जागरूकता अभियानों से जुड़े रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में राइडर्स ने न केवल बाइक चलाई, बल्कि रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न स्थानों पर लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक भारत की महिलाएं और युवा अब बदलाव के वाहक बन रहे हैं। राजघाट से शुरू हुई यह यात्रा केवल मेरठ तक ही नहीं रुकी, बल्कि इसने लोगों के मन में सुरक्षा और सम्मान की एक नई ज्योत प्रज्वलित की है।

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