Carbon Credit Finance Scheme लागू करने वाला पहला राज्य बना यूपी, किसानों की आय और पर्यावरण दोनों को मिलेगा लाभ

Carbon Credit Finance Scheme

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उत्तर प्रदेश ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए Carbon Credit Finance Scheme लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को भी मजबूत आधार देगी। राज्य की हालिया आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण पहल का उल्लेख किया गया है।

 किसानों की आय बढ़ाने की नई पहल

कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना (Carbon Credit Finance Scheme ) के तहत ऐसे कृषि और पर्यावरणीय प्रयासों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक हों। किसान अब पर्यावरण के अनुकूल खेती, वृक्षारोपण और हरित गतिविधियों के जरिए कार्बन क्रेडिट अर्जित कर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकेंगे। इससे खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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ग्रीन चौपाल और वन संरक्षण पर जोर

Carbon Credit Finance Scheme के तहत सतत विकास की दिशा में प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘ग्रीन चौपाल’ का गठन किया गया है, जहां पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है। घनी आबादी वाला राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश वन एवं वृक्षावरण क्षेत्र में देश में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण अभियानों के माध्यम से जैव विविधता को भी संरक्षित किया जा रहा है।

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हरित ऊर्जा में बड़ी छलांग

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, उत्तर प्रदेश स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति–2022 के तहत अगले पांच वर्षों में 22,000 मेगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

इसमें 6,000 मेगावाट रूफटॉप सोलर संयंत्रों से, 14,000 मेगावाट यूटिलिटी स्केल और सोलर पार्कों से और 2,000 मेगावाट पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से बिजली उत्पादन किए जाने का लक्ष्य है।

इससे उपभोक्ताओं को सस्ती, स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध होगी। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में 288 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता थी, वहीं अब यह बढ़कर 2,815 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।

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गरीबी उन्मूलन में ऐतिहासिक प्रगति

आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में बहुआयामी गरीबी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां गरीबी दर 42.59 प्रतिशत थी, वह 2022-23 में घटकर 17.40 प्रतिशत रह गई। इस अवधि में 5.94 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो देश में सर्वाधिक है।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र परिवारों को निशुल्क और रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। डिजिटल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से राज्य की 78,510 उचित दर दुकानों से लाभार्थियों को पारदर्शी तरीके से राशन मिल रहा है।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 की तुलना में 2024-25 तक विवाहों की संख्या लगभग पांच गुना और खर्च सात गुना तक बढ़ाया गया है।

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