कंगाली की कगार पर पाकिस्तान: विदेशी मुद्रा के लिए अब शराब बेचेगी ऐतिहासिक ‘Murree Brewery’

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पाकिस्तान से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको थोड़ा हैरान कर दिया है। वहां की इकलौती स्थानीय स्वामित्व वाली कंपनी 'Murree Brewery' ने करीब पाँच दशकों के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने मादक पेयों (Alcohol) का निर्यात शुरू कर दिया है। हालांकि पाकिस्तान में मुस्लिम आबादी के लिए शराब पर अब भी पाबंदी है, लेकिन कंपनी ने दुनिया के अन्य बाजारों में अपनी जगह बनाने के लिए कमर कस ली है।

एक ऐतिहासिक शुरुआत और नई मंजिलें

Murree Brewery ने इस साल अप्रैल से ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को अपनी बीयर और अन्य मादक उत्पादों की खेप भेजनी शुरू की है। कंपनी के निर्यात प्रबंधक रमीज शाह के मुताबिक, फिलहाल उन देशों पर फोकस किया जा रहा है जो इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) का हिस्सा नहीं हैं।

दरअसल, ओआईसी में वो 57 देश शामिल हैं जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है और वहां शराब को लेकर कड़े नियम हैं। Murree Brewery पिछले कई सालों से जूस और मिनरल वॉटर जैसे गैर-मादक उत्पाद तो विदेशों में बेच रही थी, लेकिन असली पहचान यानी बीयर के लिए उसे सरकार की हरी झंडी का इंतजार था।

Murree Brewery
Murree Brewery द्वारा उपयोग की जाने वाली सबसे शुरुआती इमारतों में से एक के खंडहर

2025 में मिली सरकार से बड़ी राहत

कंपनी के लिए सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 2025 में सरकार से मंजूरी मिली। कंपनी के निर्यात प्रबंधक रमीज शाह ने बताया कि पिछले साल पाकिस्तान सरकार ने उन्हें मादक पेयों के निर्यात का लाइसेंस दे दिया। यह फैसला कंपनी के लिए संजीवनी जैसा साबित हुआ है। Murree Brewery का इतिहास बहुत पुराना है। इसकी नींव 1860 के दशक में एडवर्ड डायर और एडवर्ड व्हिम्पर नाम के दो ब्रिटिश उद्यमियों ने रखी थी। उस वक्त इसका मकसद मरी के हिल स्टेशन पर तैनात ब्रिटिश सैनिकों को बीयर उपलब्ध कराना था।

बंटवारे के बाद का सफर और पारसी परिवार का साथ

आजादी और विभाजन के बाद इस कंपनी की कमान एक पारसी परिवार के हाथ में आ गई। फिलहाल इसके प्रमुख इस्फनयार भंडारा हैं, जो न केवल एक कारोबारी हैं बल्कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य भी हैं। भंडारा ने निर्यात लाइसेंस दिलाने के लिए काफी लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ी है।

दिलचस्प बात यह है कि साल 2021 में पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान में चीनी नागरिकों की जरूरतें पूरी करने के लिए एक चीनी कंपनी को भी ब्रुअरी चलाने की अनुमति दी थी। लेकिन Murree Brewery के लिए अपनी पुरानी साख को वापस पाना एक भावनात्मक जीत जैसा है।

Murree Brewery

पाबंदियों का दौर और पुराने दिन

अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो पाकिस्तान में शराब पर हमेशा से पाबंदी नहीं थी। साल 1977 तक आम नागरिक भी शराब खरीद सकते थे। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने धार्मिक दलों के दबाव में आकर इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। इस फैसले ने Murree Brewery के कारोबार को सीधे तौर पर प्रभावित किया।

तब से लेकर अब तक, कंपनी केवल गैर-मुस्लिम पाकिस्तानियों और विदेशी मेहमानों को ही सरकार द्वारा तय दुकानों के जरिए अपनी सप्लाई दे पाती थी। रमीज शाह कहते हैं कि पाबंदी से पहले उनकी बीयर भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका तक जाती थी।

Murree Brewery

आगे की राह और आर्थिक उम्मीदें

मरी ब्रुअरी के लिए पिछला साल आर्थिक रूप से काफी अच्छा रहा। कंपनी ने करीब 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर का राजस्व कमाया, जिसमें एक बड़ा हिस्सा जूस और माल्ट ड्रिंक्स का था। अब निर्यात शुरू होने के बाद कंपनी को उम्मीद है कि वे ज्यादा विदेशी मुद्रा कमा सकेंगे। फिलहाल उनका ध्यान पुराने वितरकों के साथ नेटवर्क मजबूत करने और दुनिया के नए बाजारों में संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures) तलाशने पर है।

Murree Brewery

पाकिस्तान जैसे देश में, जहां शराब को लेकर सामाजिक और कानूनी बंदिशें काफी सख्त हैं, वहां से किसी ब्रुअरी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करना एक बड़ी खबर है। यह न केवल Murree Brewery के लिए बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक नए रास्ते खुलने जैसा है। देखना होगा कि आने वाले समय में दुनिया भर के बीयर शौकीनों के बीच यह ब्रांड कितनी जगह बना पाता है।

यह भी पढ़ें: Union Cabinet ने दी मंजूरी: 5659 करोड़ रुपये के ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ से कैसे बदलेगी तस्वीर?

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