कमरावां झील बनेगी बाराबंकी की नई पहचान, वेटलैंड विकास से बढ़ेगा ईको-टूरिज्म

बाराबंकी

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बाराबंकी जिले के हरख ब्लॉक स्थित कमरावां झील अब प्रदेश सरकार की वन जिला–वन वेटलैंड योजना के तहत जिले की नई पहचान बनने जा रही है। वन विभाग ने इस झील को वेटलैंड के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भेजा है। इस परियोजना की खास बात यह है कि झील के भीतर मिट्टी के कृत्रिम टीले बनाए गए हैं, जो प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के विश्राम और प्रजनन के लिए सुरक्षित माने जा रहे हैं। लगभग 29.37 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह झील लखनऊ से 35 किलोमीटर और बाराबंकी मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर स्थित है। इन दिनों यहां ऑस्ट्रेलिया, साइबेरिया और जापान सहित कई देशों से हजारों प्रवासी पक्षी पहुंचे हैं। वेटलैंड के विकास से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी और ईको-टूरिज्म के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। डीएफओ आकाश दीप बधावन के अनुसार, यह योजना जिले को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगी।

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कमरावां, पाटमऊ, रसूलपुर और मुहम्मदाबाद गांवों से घिरी यह झील अपनी समृद्ध प्राकृतिक जैव विविधता के कारण पहले से ही प्रसिद्ध रही है। योजना के तहत कमरावां झील को औपचारिक रूप से वेटलैंड का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए स्थानीय लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं। प्रशासन का मानना है कि जनसहयोग और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए ही इस प्राकृतिक धरोहर का दीर्घकालीन संरक्षण और विकास संभव है।

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ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क और तिब्बत से पहुंचे परिंदे 

पक्षियों के संरक्षण की नई उम्मीद के रूप में उभर रही कमरावां झील इन दिनों विदेशी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है। इस वेटलैंड में सुरक्षित आश्रय की तलाश में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, साइबेरिया (रूस), जापान और तिब्बत जैसे दूरस्थ देशों से हजारों प्रवासी पक्षी पहुंचे हैं। शांत और प्राकृतिक माहौल वाली इस झील में इन दिनों नॉर्दर्न पिनटेल, गडवाल, कॉमन टील, मलार्ड और नकटा (नॉब-बिल डक) जैसे विदेशी पक्षियों का जमावड़ा देखा जा रहा है। इनके साथ-साथ सारस, बगुले और काली चील जैसे देशी पक्षी भी बड़ी संख्या में यहां मौजूद हैं।

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झील से खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते 

आकाशदीप बधावन, डीएफओ ने कहा कि कमरावां झील के सुनियोजित विकास से पर्यावरण संरक्षण को तो मजबूती मिलेगी ही, साथ ही जिले में ईको-टूरिज्म की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। वेटलैंड के रूप में विकसित होने के बाद यह झील बाराबंकी को एक प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में पहचान दिलाएगी।

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