सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री, शपथ के दौरान लगे ‘अजित दादा अमर रहे’ के नारे

सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री

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मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में आज भावनात्मक और ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब सुनेत्रा पवार ने राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जहां एक ओर सुनेत्रा पवार पद और गोपनीयता की शपथ ले रही थीं, वहीं दूसरी ओर लोकभवन में मौजूद एनसीपी (अजित गुट) के समर्थक “अजित दादा अमर रहे” के नारे लगाते नजर आए। यह दृश्य दिवंगत नेता अजित पवार के प्रति कार्यकर्ताओं की भावनाओं को साफ तौर पर दर्शा रहा था।

सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मराठी भाषा में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। जैसे ही उन्होंने शपथ पूरी की, सभागार “अजित दादा अमर रहे” और “सुनेत्रा तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं” जैसे नारों से गूंज उठा। समर्थक तब तक नारे लगाते रहे, जब तक सुनेत्रा पवार ने शपथ से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं कर दिए।

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शपथ ग्रहण के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हाथ जोड़कर सुनेत्रा पवार का अभिवादन किया। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनसे कुछ क्षण बातचीत की। इसके बाद सुनेत्रा पवार मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ राज्यपाल को विदा करने के लिए नीचे उतरीं।

गौरतलब है कि अजित पवार का बुधवार को एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। वह बारामती में पार्टी की एक सभा को संबोधित करने जा रहे थे, तभी रनवे से पहले विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 66 वर्ष की उम्र में उनके आकस्मिक निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई थी। इसके बाद एनसीपी (अजित गुट) ने पार्टी की आपात बैठक बुलाकर सुनेत्रा पवार को नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया।

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शुक्रवार को हुई इस बैठक में पार्टी नेताओं ने सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसके बाद वह शुक्रवार देर रात पुणे से मुंबई पहुंचीं, ताकि शनिवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकें।

सुनेत्रा पवार की शपथ के दौरान लगे नारों ने यह साफ कर दिया कि पार्टी कार्यकर्ता अजित पवार को आज भी अपने नेता के रूप में याद कर रहे हैं और उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब सुनेत्रा पवार के कंधों पर है। यह शपथ ग्रहण समारोह न केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया था, बल्कि एक युग के अंत और नए नेतृत्व की शुरुआत का प्रतीक भी बन गया।

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