लखनऊ में राष्ट्रीय पीठासीन अधिकारियों का 86वां सम्मेलन: 19 से 21 जनवरी तक लोकतांत्रिक विमर्श का महाकुंभ

86वां

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लखनऊ में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक विमर्श का ऐतिहासिक आयोजन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 19 से 21 जनवरी तक राष्ट्रीय संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के एक महत्वपूर्ण आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। विधान भवन में अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का 86वां सम्मेलन तथा विधायी निकायों के सचिवों का 62वां सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के अध्यक्ष, विधान परिषदों के सभापति और संसद के वरिष्ठ पदाधिकारी भाग लेंगे। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना करेंगे। आयोजन का उद्देश्य देश की विधायी संस्थाओं को और अधिक सशक्त, प्रभावी तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप बनाना है।

उद्घाटन और समापन सत्र की प्रमुख हस्तियां

सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन 19 जनवरी को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओमप्रकाश बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की विशेष उपस्थिति रहेगी। इन वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारियों की मौजूदगी इस आयोजन के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करती है।

सम्मेलन का समापन 21 जनवरी को होगा, जिसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे। समापन सत्र में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भविष्य की भूमिका, सुशासन और विधायी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

विधायी परंपरा और सम्मेलन का इतिहास

विधानमंडलीय परंपरा के तहत राष्ट्रीय पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन प्रत्येक वर्ष देश के किसी न किसी राज्य में आयोजित किया जाता है। पिछली बार इसका आयोजन कर्नाटक में हुआ था। उत्तर प्रदेश को यह गौरव चौथी बार प्राप्त हो रहा है। इससे पहले वर्ष 2015 में प्रदेश ने इस सम्मेलन की मेजबानी की थी। यह तथ्य दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश विधायी प्रक्रियाओं और संसदीय मर्यादाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

समानांतर सत्र और मुख्य विषय

सम्मेलन के समानांतर 19 जनवरी को विधानसभा और विधान परिषदों के सचिवों का अलग सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। वहीं 20 जनवरी को मुख्य सत्र में विधायी संस्थाओं की भूमिका, संसदीय मर्यादा, कार्यकुशलता, तकनीकी नवाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। इन सत्रों के माध्यम से विधायी कार्यों को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा।

यातायात व्यवस्था में परिवर्तन

कार्यक्रम में अध्यक्ष लोकसभा, राज्यपाल व मुख्यमंत्री समेत अन्य शामिल होंगे। इसकी वजह से विधान भवन व इसके आस-पास 19 जनवरी से 21 जनवरी तक सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक डायवर्जन प्लान लागू रहेगा। तीन दिनों तक वीआईवी मूवमेंट के कारण प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें।

विधान भवन के आसपास कड़ी सुरक्षा

सम्मेलन को देखते हुए विधान भवन और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत सुदृढ़ किया गया है। सुरक्षा को पांच जोन और 13 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। हाल की सुरक्षा घटनाओं को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

सुरक्षा व्यवस्था में पांच अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी), 13 उप पुलिस अधीक्षक (डिप्टी एसपी), 45 इंस्पेक्टर, 460 पुरुष दरोगा, 36 महिला दरोगा, 817 हेड कांस्टेबल, 143 महिला कांस्टेबल, 153 होमगार्ड, पांच प्लाटून पीएसी, बम निरोधक दस्ता तथा एटीएस कमांडो शामिल हैं। इसके अलावा जिलाधिकारी द्वारा बड़ी संख्या में मजिस्ट्रेट की भी ड्यूटी लगाई गई है।

राजधानी के लिए गौरव का अवसर

राष्ट्रीय पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए लोकतांत्रिक विमर्श को सशक्त करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। लखनऊ जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर में इस आयोजन से प्रदेश की प्रशासनिक क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था और संसदीय परंपराओं की मजबूत छवि राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत होगी।

यह सम्मेलन आने वाले वर्षों में विधायी संस्थाओं के कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।

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