प्रयागराज के छिबैया गांव में तेंदुआ पकड़ा गया | Prayagraj

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उत्तर प्रदेश के Prayagraj जिले में पिछले लगभग 6 महीनों से दहशत का पर्याय बने खूंखार तेंदुए को आखिरकार पिंजरे में कैद कर लिया गया। झूंसी सहित चार थाना क्षेत्रों में यह तेंदुआ स्थानीय ग्रामीणों के लिए लगातार खतरा बना हुआ था। इस दौरान उसने दर्जनों छोटे मवेशियों को मार डाला और कई लोगों को घायल किया।

हालांकि, पकड़े जाने से पहले तेंदुए ने झूंसी थाना क्षेत्र के छिवैया गांव में दो लोगों को जख्मी कर दिया। ग्रामीणों और पुलिस के प्रयासों के बाद वन विभाग की टीम ने इसे सुरक्षित तरीके से कैद कर लिया।

दहशत का माहौल

इस खूंखार आदमखोर तेंदुए ने पिछले छह महीनों में विभिन्न गांवों में आतंक फैलाया। वन विभाग और पुलिस के अनुसार, तेंदुए ने दर्जनों छोटे मवेशियों को मार डाला और लगभग दर्जनभर ग्रामीणों को घायल किया। ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया था, लोग खेतों में काम करने से डर रहे थे और रात में घरों के बाहर निकलने से परहेज कर रहे थे।

तेंदुए की लगातार हमलों ने प्रशासन को भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में डाल दिया। वन विभाग और स्थानीय पुलिस कई बार उसे पकड़ने के प्रयास कर चुके थे, लेकिन तेंदुए की चतुराई और तेजी के कारण हर प्रयास असफल हो गया।

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कैसे पकड़ में आया तेंदुआ?

घटना उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब गुरुवार की सुबह 5 बजे तेंदुआ छिवैया गांव में शिकार की तलाश में पहुंचा। तेंदुआ किसी को शिकार बनाता, उससे पहले ग्रामीणों ने उसे देख लिया और हल्ला मचा दिया।

तेंदुए ने हमला कर दो लोगों को जख्मी कर दिया और लंबी छलांग मारकर एक किसान के घर में प्रवेश कर लिया। किसान ने अपनी सूझबूझ से तेंदुए को घर में बंद कर दिया और परिजनों को रोशनदान के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला। इस नाटकीय घड़ी में किसी की जान बच गई, लेकिन ग्रामीणों में डर और चिंता फैल गई।

पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई

तेंदुए की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। इसके बाद वन विभाग को बुलाया गया। डीएफओ अरविंद यादव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। लेकिन सीधे तेंदुए को पकड़ना असंभव था। वन विभाग ने तय किया कि तेंदुए को बेहोश करके ही पकड़ना सुरक्षित होगा

कानपुर के चिड़ियाघर से पशु चिकित्सक डॉ. नासिर को बुलाया गया। दोपहर तक वह मौके पर पहुंचे और तेंदुए को पकड़ने की तैयारी शुरू की गई।

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10 घंटे की मशक्कत के बाद काबू

डॉ. नासिर और वन विभाग की टीम ने करीब 10 घंटे की मेहनत और सावधानी के बाद तेंदुए को बेहोश करने में सफलता पाई। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे निकालकर पिंजरे में बंद किया

तेंदुए को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद किसी सुरक्षित जंगल या संरक्षित क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा, ताकि न केवल उसका जीवन सुरक्षित रहे, बल्कि आसपास के ग्रामीणों और पशुधन के लिए खतरा भी समाप्त हो सके।

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