CM Yogi Mahoba visit: रोपे-वे से लेकर औद्योगिक क्रांति तक 697 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 88 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

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CM Yogi Mahoba visit: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को बुंदेलखंड के Mahoba और हमीरपुर जिले के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने महोबा को उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान वापस दिलाने का भरोसा दिया। जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि यह वीरों और ऋषियों की धरती है, जिसने देश को आल्हा-ऊदल जैसे पराक्रमी योद्धा दिए हैं। पिछली सरकारों की गलत नीतियों की वजह से जो बुंदेलखंड कभी पहचान के संकट से जूझ रहा था, आज वह देश के विकास की मुख्यधारा में सबसे आगे खड़ा है।

CM Yogi Mahoba visit

महोबा को करोड़ों की सौगात और पर्यटन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को महोबा पहुंचे, जहां उन्होंने जिले के विकास के लिए 697 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 88 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। महोबा आगमन पर सीएम ने करीब 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐतिहासिक गोरखगिरि पर्वत पर जाकर भोलेनाथ के दर्शन-पूजन किए और आशीर्वाद लिया। उन्होंने घोषणा की कि सरकार यहाँ आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए गोरखगिरि पर रोप-वे का निर्माण कराने जा रही है। इस पूरे क्षेत्र को एडवेंचर टूरिज्म (साहसिक पर्यटन) के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक महोबा महोत्सव को अब और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक की खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं होंगी। आल्हा-ऊदल के शौर्य की याद में यहाँ नए अखाड़ों का निर्माण कराया जाएगा ताकि युवा अपनी मिट्टी की ताकत से जुड़ सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहाँ का ग्रेनाइट पत्थर सिर्फ घर-मकान बनाने के काम नहीं आता, बल्कि यह देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहा है। चंदेल राजाओं की यह वीरभूमि अब अपने खास देसावरी पान के लिए भी दुनिया भर में जानी जा रही है।

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कानून व्यवस्था पर कड़ा रुख और विपक्ष पर निशाना

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना पिछली व्यवस्थाओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पहले जिनके पास सत्ता थी, वे जमीनों और संसाधनों पर अवैध कब्जा करने जैसे नकारात्मक कार्यों में लगे रहते थे। उन्हीं लोगों ने उत्तर प्रदेश को विकास की दौड़ में पीछे धकेल दिया था। साल 2017 से पहले बुंदेलखंड की कनेक्टिविटी बेहद खराब थी और पूरे इलाके में भूमाफिया, वन माफिया तथा खनन माफिया का बोलबाला था। उत्सवों और त्योहारों से ठीक पहले उपद्रव होना यहाँ आम बात थी, जिसके कारण न तो व्यापारी सुरक्षित महसूस करते थे और न ही बेटियां बाहर निकल पाती थीं।

कानून व्यवस्था पर अपनी सरकार की नीति को स्पष्ट करते हुए सीएम ने कहा कि हमने माफिया को मिट्टी में मिलाने का जो संकल्प लिया था, उस पर दृढ़ता से काम हो रहा है। उन्होंने हमीरपुर में जनसभा के दौरान भी अपराधियों को कड़े लहजे में चेतावनी दी कि राज्य में बेटियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं है। जो कोई भी ऐसा दुस्साहस करेगा, उसकी जगह जेल में होगी या फिर वह सीधे यमराज के पास जाएगा। आज डबल इंजन की सरकार की सख्त नीतियों के कारण सभी अपराधी और उपद्रवी पूरी तरह पस्त हैं, जिससे राज्य में सुशासन और विकास का माहौल बना है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से बीडा तक औद्योगिक क्रांति

बुंदेलखंड के बुनियादी ढांचे में आए बदलाव की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने डिफेंस कॉरिडोर और नए औद्योगिक क्षेत्रों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसी आधुनिक कनेक्टिविटी है, जिसने दिल्ली और लखनऊ की दूरी को कम कर दिया है। कभी रक्षा उपकरणों के लिए दुनिया के आगे हाथ फैलाने वाला भारत आज अपनी मिसाइलें खुद बना रहा है। लखनऊ डिफेंस कॉरिडोर में बनी ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत पूरी दुनिया देख चुकी है। सरकार चाहती है कि चित्रकूट, झांसी और हमीरपुर के साथ-साथ अब महोबा भी इस रक्षा उत्पादन और औद्योगिक क्लस्टर का मुख्य केंद्र बने।

इलाके की नई औद्योगिक पहचान को लेकर उन्होंने बताया कि बीडा (बुंदेलखंड औद्योगिक डेवलपमेंट अथॉरिटी) के गठन के बाद अब इस पूरे क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी औद्योगिक पहचान मिलने जा रही है। देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियां यहाँ अपने प्रोजेक्ट लगा रही हैं, जिससे यहाँ के स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए अपनी माटी छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा चित्रकूट में नया हवाई अड्डा चालू हो चुका है और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें बुंदेलखंड के लोगों के सफर को आसान बना रही हैं।

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जल संरक्षण और केन-बेतवा लिंक परियोजना

बुंदेलखंड की सबसे पुरानी समस्या यानी पानी की किल्लत पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले यहाँ की माताओं और बहनों का पूरा जीवन सिर पर मिट्टी के घड़े रखकर पानी ढोने में ही बीत जाता था। इस संकट को खत्म करने के लिए सरकार ने ‘हर घर जल नल योजना’ शुरू की, जिससे आज घर-घर पानी पहुंच रहा है। उन्होंने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि चंदेल राजाओं द्वारा बनवाए गए प्राचीन तालाब जल संरक्षण के बेहतरीन उदाहरण हैं। हमें अपनी इस विरासत से सीख लेकर जल की एक-एक बूंद को बचाना होगा।

मुख्यमंत्री ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता से अपील की कि वे मानसून से पहले इन पारंपरिक तालाबों से गाद (सिल्ट) हटवाने के काम में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जून का महीना बीतने को है लेकिन अभी तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है। असमय और कम बारिश की भविष्यवाणियों को देखते हुए सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर (फव्वारा पद्धति) जैसे आधुनिक वैज्ञानिक तरीके अपनाने चाहिए।

कबरई बांध के प्रभावित किसानों को वर्षों से लंबित मुआवजा दिलाने का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई अन्नदाताओं या युवाओं का शोषण करने की कोशिश करेगा, तो उसकी उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। सरकार केन-बेतवा लिंक परियोजना के साथ-साथ मझगवां और रतौली बांध जैसी सिंचाई योजनाओं के जरिए बुंदेलखंड के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रहा बुंदेलखंड आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर नजर आ रहा है। महोबा में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, पर्यटन का आधुनिकीकरण और एक्सप्रेसवे के किनारे उद्योगों का जाल बिछने से इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। मुख्यमंत्री के इस दौरे और उनकी घोषणाओं से साफ है कि सरकार विकास के साथ-साथ यहाँ की सांस्कृतिक विरासत को भी संवारने का काम कर रही है। अब जिम्मेदारी स्थानीय जनता और प्रशासन की है कि वे पानी बचाने और विकास की इन योजनाओं को सफल बनाने में अपना पूरा सहयोग दें।

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