राष्ट्रपति के हाथों पीएम बाल पुरस्कार से सम्मानित हुईं पूजा पाल, गांव में हुआ भव्य स्वागत

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बाराबंकी के छोटे से गांव डलई का पुरवा की निवासी पूजा पाल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार पूजा को भूसा-धूल पृथक्करण यंत्र के निर्माण के लिए मिला है। यह सम्मान उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में दिया गया। जैसे ही पूजा अपने गृह जिले बाराबंकी लौटीं, गांव में उनके सम्मान में खुशी का माहौल था।

सिर्फ एक सोच ने बदल दी जिंदगी  

पूजा पाल की सफलता की कहानी हर किसी के दिल को छूने वाली है। पूजा के पिता पुत्ती लाल एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि उनकी मां सुनीला रसोईया हैं। छोटे से गांव में पैदा हुई पूजा ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच किया। केवल 3 साल पहले, पूजा ने इस यंत्र का मॉडल तैयार किया था, जिसे अपने शिक्षक राजीव श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में पूरा किया।

पूजा पाल

विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में किया अनूठा योगदान

पूजा का यह मॉडल धूल रहित थ्रेसर है, जिसे किसानों के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया था। यह मॉडल कृषि क्षेत्र में धूल से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करता है। पूजा का मानना है कि इस यंत्र से न केवल किसानों की सेहत बेहतर होगी, बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी होगी। पूजा का यह नवाचार अब ब्लॉक, जिला, और राज्य स्तर पर पहचान बना चुका है।

पूजा पाल

2023 में, पूजा का यह मॉडल इंस्पायर अवार्ड मानक की राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हुआ था। जनवरी 2024 में, पूजा को राष्ट्रीय विज्ञान मेला में देश के 100 चयनित बच्चों में शामिल किया गया। इसके बाद, 14 जून 2025 को भारत सरकार ने उन्हें जापान भ्रमण पर भेजा। 18 सितंबर को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डॉक्यूमेंट्री में भी पूजा की प्रेरणादायक कहानी को शामिल किया गया। अब, 26 दिसंबर को, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पूजा को प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार से सम्मानित किया।

गांव में खुशी का माहौल

पूजा के सम्मान में उनके गांव डलई का पुरवा में जबरदस्त खुशी का माहौल था। लखनऊ एयरपोर्ट पर पूजा का भव्य स्वागत किया गया, जहां भारी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए पहले से मौजूद थे। जिले के विभिन्न हिस्सों से लोग आकर पूजा को माला पहनाकर उनका सम्मान कर रहे थे। गांव में पहुंचते ही पूजा को कंधे पर बैठाकर उनका स्वागत किया गया।

पूजा पाल

पूजा ने इस मौके पर कहा, “मैं आगे साइंटिस्ट बनना चाहती हूं। मेरे शिक्षक राजीव श्रीवास्तव सर और माता-पिता मेरे लिए भगवान की तरह हैं। उनकी प्रेरणा से ही मैं यहां तक पहुंच पाई हूं।”

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शिक्षक ने भी किया सम्मानित

पूजा के शिक्षक राजीव श्रीवास्तव ने उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए बताया कि पूजा में धूल से जुड़ी समस्या को लेकर एक अलग सोच थी। वह लगातार जाली और धूल पृथक्करण यंत्र के बारे में सवाल पूछती रहती थी। श्रीवास्तव ने केवल पूजा की प्रतिभा को पहचाना और उसे सही दिशा में मार्गदर्शन दिया।

पूजा पाल

पूजा की भविष्य की योजनाएं

पूजा का कहना है, “यह मॉडल मेरे जीवन में कई बदलाव लेकर आया। मैं कभी नहीं सोच सकती थी कि मुझे इतनी बड़ी उपलब्धि मिलेगी। मुझे खुशी है कि मेरी छोटी सी कोशिश बड़े स्तर पर सफल हो रही है और इससे किसानों और गांववालों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा।” पूजा के इस सम्मान को देखते हुए जिले के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने पूजा के उज्जवल भविष्य की कामना की और उन्हें अपना आशीर्वाद दिया।

पूजा पाल का यह पुरस्कार केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन सभी बच्चों के लिए एक प्रेरणा है जो मेहनत, लगन, और सही दिशा से अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। उनके इस प्रयास से यह साबित हुआ कि दृढ़ संकल्प और सपने किसी भी स्थिति में टूट नहीं सकते, बशर्ते उनके पीछे सही मार्गदर्शन हो।

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