नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में हुई राष्ट्रीय मखाना बोर्ड (National Makhana Board) की बैठक, 476 करोड़ रुपए की केंद्रीय योजना से मखाना क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

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राष्ट्रीय मखाना बोर्ड (National Makhana Board) की पहली औपचारिक बैठक कल यानी शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने की। बैठक में न केवल बोर्ड के संचालन की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आरंभ किया गया, बल्कि मखाना क्षेत्र के समस्त विकास के लिए 476.03 करोड़ रुपए की केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम को लागू करने की मजबूत रूपरेखा भी तय की गई।

केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी घोषणा

केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की थी, जिसे प्रधानमंत्री द्वारा 15 सितंबर 2025 को बिहार में औपचारिक रूप से आरंभ किया गया। यह बोर्ड भारत के मखाना क्षेत्र को आधुनिक बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक बाजार में भारतीय मखाना को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से गठित किया गया है। पहली बैठक में सरकार की इस दूरदर्शी पहल को ज़मीन पर उतारने की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए।

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₹476 करोड़ की केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम को मंजूरी

बैठक में 2025-26 से 2030-31 तक के लिए 476.03 करोड़ रुपए के कुल खर्च के साथ मखाना विकास हेतु केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम को लागू करने पर मंजूरी दी है। यह स्कीम अनुसंधान एवं नवाचार, उत्तम बीज उत्पादन, किसानों की क्षमता निर्माण, बेहतर कटाई एवं कटाई के बाद के तरीकों, मूल्य वृध्दि, ब्रांडिंग (Branding), मार्केटिंग (Marketing), निर्यात समर्थन (export support) और गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित होगी।

इस योजना का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरी मखाना मूल्य क्रम को सशक्त बनाना है, ताकि किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक सभी को इसका लाभ मिल सके।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड ने विभिन्न राज्यों और अनुसंधान संस्थानों द्वारा प्रस्तुत की गई वार्षिक कार्य योजनाओं की समीक्षा की और उन्हें मंजूरी दी। इन योजनाओं के तहत पारंपरिक मखाना उत्पादक क्षेत्रों के साथ-साथ गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी मखाना की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए किसानों और प्रशिक्षकों को आधुनिक तकनीकों, बेहतर खेती पद्धतियों और उन्नत प्रसंस्करण विधियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति पर विशेष जोर

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि राज्यों की बीज संबंधी आवश्यकताओं को समय पर और समुचित रूप से पूरा किया जाए। इसके लिए बिहार के राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAU) सबौर और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAU) समस्तीपुर को इस वर्ष और अगले वर्ष गुणवत्तापूर्ण मखाना बीज की आपूर्ति की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही एनआरसी मखाना, दरभंगा की भूमिका को भी अनुसंधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में और सशक्त बनाया जाएगा।

यह कदम मखाना किसानों को बेहतर उत्पादन क्षमता और स्थिर उपज सुनिश्चित करने में सहायक होगा, जिससे उनकी आय में प्रत्यक्ष वृद्धि संभव है।

प्रशिक्षण और तकनीकी विकास

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड ने यह भी तय किया कि मखाना मूल्य शृंखला से जुड़े सभी किसानों, प्रोसेसरों और उद्यमियों के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें ग्रेडिंग, सुखाने, पॉपिंग और पैकेजिंग जैसी गतिविधियों के लिए आधुनिक आधारिक संरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, खेती और प्रक्रिया से जुड़ी नई तकनीकों के विकास, मूल्य वृध्दि, ब्रांडिंग, मार्केट लिंकेज और एक्सपोर्ट की तैयारी को भी योजना का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।

मखाना (Makhana) क्षेत्र के लिए एक नई दिशा

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की यह संस्थापक बैठक पूरे भारत में मखाना क्षेत्र के समन्वित और विकास के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करती है। सरकार का यह प्रयास न केवल मखाना किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि भारत को वैश्विक मखाना बाजार में एक मजबूत और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

यह भी पढे़ – 2027 में भारत में पहली डिजिटल जनगणना (Digital census): जानें पूरी प्रक्रिया और बजट

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