मध्य प्रदेश के बालाघाट में KB डिविजन के 10 नक्सलियों ने किया सरेंडर

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मध्य प्रदेश के बालाघाट में नक्सलियों का आत्मसमर्पण

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में नक्सल विरोधी अभियान में एक ऐतिहासिक घटना घटी है। इस घटनाक्रम के तहत शनिवार रात को 10 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया, जिसमें 77 लाख रुपये का इनामी नक्सली कबीर उर्फ महेंद्र भी शामिल था। यह घटना न केवल बालाघाट बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो रही है, क्योंकि यह पहली बार हुआ है कि इतने बड़े पैमाने पर नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं।

यह घटनाक्रम इस बात का प्रतीक है कि राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों से नक्सलवाद की समस्या अब खत्म होने के कगार पर है। बालाघाट जिले में पिछले 35 वर्षों से नक्सलवाद की समस्या मौजूद रही थी, लेकिन अब यह लगभग समाप्त हो चुका है। यह आत्मसमर्पण उस संघर्ष का परिणाम है, जो सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ लगातार जारी रखा है।

6 पुरुष और 4 चार महिलाओं ने किया आत्मसमर्पण

इस आत्मसमर्पण में 10 नक्सलियों में चार महिलाएं और छह पुरुष शामिल हैं। इन नक्सलियों ने पिछले कई वर्षों से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के सीमा क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए हिंसक गतिविधियों में भाग लिया था। विशेष रूप से कबीर उर्फ महेंद्र, जो कान्हा-भोरमदेव (KB) डिवीजन का प्रमुख था, पर कई गंभीर आपराधिक मामलों में 77 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश सीमा के जंगलों में अपनी सक्रियता बनाए रखे हुए था, और उसकी गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

इसके साथ ही नक्सलियों के आत्मसमर्पण के इस कदम को मध्य प्रदेश सरकार और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इन नक्सलियों ने अपने अपराधों से तौबा करते हुए शांतिपूर्ण जीवन जीने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

फॉरेस्ट गार्ड की मदद से किया सरेंडर 

इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण करने के लिए एक फॉरेस्ट गार्ड की मदद ली थी, जिसने उन्हें हॉक फोर्स के जवानों से संपर्क करने में सहायता प्रदान की। रात के करीब 11 बजे, यह नक्सली बालाघाट के रेंज आईजी के बंगले में पहुंचे, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस लाइन में लाया गया, जहां फिलहाल उनसे पूछताछ की जा रही है और सरेंडर की कागजी कार्रवाई की जा रही है।

सीएम की उपस्थिति में होगा औपचारिक सरेंडर

इस ऐतिहासिक घटना की गंभीरता को समझते हुए, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर बालाघाट आने का निर्णय लिया है। वे आज दोपहर 3 बजे बालाघाट पहुंचेगे, जहां इन नक्सलियों द्वारा औपचारिक रूप से हथियार सौंपे जाएंगे। मुख्यमंत्री की उपस्थिति को नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।

सरेंडर कार्यक्रम के दौरान इन नक्सलियों द्वारा अपनी मर्जी से हथियार छोड़ने को राज्य सरकार एक बड़ी जीत के रूप में प्रस्तुत करेगी। यह न केवल नक्सलियों के हिंसा छोड़ने के कदम को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि इस घटना से अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।

बालाघाट में नक्सल विरोधी अभियान की सफलता

बालाघाट में पिछले कुछ वर्षों में नक्सल विरोधी अभियान ने नक्सलियों के खिलाफ कई सफलता प्राप्त की है। सुरक्षा बलों और राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के कारण नक्सली अब डर और दबाव के कारण आत्मसमर्पण करने को मजबूर हो गए हैं। इस आत्मसमर्पण की घटना से न केवल राज्य सरकार को एक बड़ी सफलता मिली है, बल्कि यह पूरे देश में नक्सलवाद के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश भेजेगी।

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