Pharma Price Guidelines 2026: राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को बड़ा फैसला लेते हुए 100 से अधिक कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की सीमा 30% तय कर दी गई है। जिसके बाद यह नई व्यवस्था 9 नवंबर से प्रभावी होगी। इससे सप्लाई चेन के दौरान जुड़ने वाले अतिरिक्त मार्जिन पर लगाम लगेगी और दवाओं की खुदरा कीमतों (MRP) में 70% तक की भारी गिरावट देखने को मिलेगी, जिससे कैंसर पीड़ितों को सस्ता और सुलभ इलाज मिल सकेगा।
केंद्र सरकार द्वारा कैंसर रोधी दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने का निर्णय
केंद्र सरकार द्वारा कैंसर रोधी दवाओं की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य निर्माण इकाई से लेकर स्टॉकिस्ट, वितरक और खुदरा विक्रेताओं तक वितरण श्रृंखला में जुड़ने वाले भारी-भरकम लाभ मार्जिन को सीमित करना है। अधिसूचित सूची के अंतर्गत पेटेंट वाली और बिना पेटेंट वाली दोनों श्रेणियों की कैंसर दवाएं इस निर्णय के दायरे में आ सकती हैं। इसके साथ ही, सरकार ने दवा निर्माता कंपनियों को इन दवाओं के वर्तमान उत्पादन और आपूर्ति तंत्र को बिना किसी रुकावट के जारी रखने का निर्देश दिया है।
दवाओं की कीमते घटने में ट्रेड मार्जिन की भूमिका अहम
दवाइयों के दाम में गिरावट का गणित समझने के लिए निर्माण लागत और ट्रेड मार्जिन के अंतर को जानना आवश्यक है। यदि किसी दवा की शुरुआती कीमत कम रखी गई है, लेकिन सप्लाई चेन के दौरान उसमें भारी मार्जिन जोड़ा जाता है, तो मार्जिन पर सीमा तय होते ही एमआरपी (MRP) में बड़ी गिरावट आ सकती है। इसके विपरीत, यदि दवा की शुरुआती लागत ही अधिक है, तो ट्रेड मार्जिन घटाने के बाद भी उसकी अंतिम कीमत अधिक ही बनी रहेगी।
मरीज अब दवाओं के संशोधित दाम ‘फार्मा सही दाम’ मोबाइल ऐप के साथ-साथ आधिकारिक वेबसाइट पर भी आसानी से देख सकते हैं। इसके अलावा, राज्य के औषधि नियंत्रक (ड्रग कंट्रोलर) की यह जिम्मेदारी होगी कि सभी दवा निर्माता कंपनियां, रिटेल विक्रेता और अस्पताल इन नए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
यह भी पढ़ें: चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल हादसे में 19 लोगों की मौत और 25 घायल, सीएम ने किया मुआवजे का ऐलान