Naimisharanya Lalita Devi Mandir के दर्शन और इतिहास। Sitapur

Naimisharanya Lalita Devi Mandir

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Naimisharanya Lalita Devi Mandir: शारदीय नवरात्र का पावन समय चल रहा है और चारों तरफ मां दुर्गा की भक्ति का माहौल है। उत्तर प्रदेश में कई ऐसे सिद्ध और धार्मिक स्थान हैं, जहां इन दिनों भक्तों का तांता लगा रहता है। आज हम आपको लेकर चलते हैं सीतापुर जिले (Sitapur) के नैमिषारण्य में स्थित मां ललिता देवी (Maa Lalita Devi) के प्रसिद्ध मंदिर में। यह जगह न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से खास है, बल्कि यहां का शांत और पवित्र माहौल मन को एक अलग ही सुकून देता है। आइए जानते हैं इस प्राचीन शक्तिपीठ की क्या है खासियत और यहां से जुड़ी मान्यताएं।

51 शक्तिपीठों में शामिल है यह धाम

सीतापुर जिले में स्थित नैमिषारण्य, जिसे नीमसार भी कहा जाता है, पौराणिक काल से ही बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इसी पावन भूमि पर मां ललिता देवी का प्राचीन मंदिर है, जो देश के 51 शक्तिपीठों में शामिल है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर चल रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के अंगों को विभाजित किया था। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती का हृदय गिरा था, जिसके बाद से यह जगह शक्तिपीठ के रूप में पूजी जाने लगी। यहां मां को आदि पराशक्ति और लिंगधारिणी शक्ति के रूप में भी पूजा जाता है। मंदिर में माता पिंडी के स्वरूप में विराजमान हैं, जिनके दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

चक्रतीर्थ और मां ललिता देवी की महिमा

इस स्थान की महिमा से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार 88 हजार ऋषियों की प्रार्थना पर मां ललिता देवी ने चक्रतीर्थ के चक्र के तीव्र वेग को थामा था और पृथ्वी को जलमग्न होने से बचाया था। चक्रतीर्थ के पास स्थित इस मंदिर की अपनी एक खास पहचान है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर दोनों तरफ बनी हाथियों की मूर्तियां इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती हैं। नवरात्र के दिनों में यहां विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। इसके साथ ही कन्या भोज का भी विशेष महत्व होता है। शारदीय और वासंतिक दोनों ही नवरात्र में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और माता के दरबार में मत्था टेककर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

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