Prayagraj: नवरात्रि पर प्रयागराज का मां अलोप शंकरी शक्तिपीठ श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां माता की मूर्ति नहीं, पवित्र पालने की पूजा होती है। मां के दर्शन के लिए इन दिनों भारी भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित है मां अलोप शंकरी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ, जो अपनी अनूठी धार्मिक परंपरा के लिए जाना जाता है। भारत के 51 शक्तिपीठों में शामिल यह धाम प्रयागराज के अलोपीबाग में स्थित है। यहां माता की कोई पारंपरिक मूर्ति नहीं है। बल्कि पवित्र पालने और उसके नीचे स्थित कुंड की पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां इसी दिव्य स्वरूप में विराजमान हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। भक्त पालने में विराजमान मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे थे। तब इस स्थान पर उनके दाहिने हाथ का पंजा या कलाई गिरकर अदृश्य हो गई थी। इसी मान्यता के चलते इस धाम का नाम अलोप शंकरी पड़ा। मंदिर में स्थित कुंड को श्रद्धालु पवित्र मानते हैं। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर भक्त कुंड में दूध, दही और मेवे अर्पित करते हैं। वहीं, पवित्र पालने पर रक्षा सूत्र बांधकर अपने परिवार की खुशहाली और मंगल की कामना करते हैं। इस शक्तिपीठ में लोगों की अटूट आस्था है। यही वजह है कि यहां सालभर धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ का सिलसिला जारी रहता है।
अलोप शंकरी शक्तिपीठ में नवदंपती भी वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना लेकर पहुंचते हैं। वहीं, बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए भी परिवार यहां आते हैं। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ काल भैरव, मां शीतला, भगवान गणेश, श्री ललितेश्वर महादेव और भगवान हनुमान के मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। वहीं, नवरात्रि में यहां आस्था का रंग और भी गहरा हो जाता है।




