UP Scholarship Update: CM Yogi ने बटन दबाकर 4.60 छात्रों को ट्रांसफर की छात्रवृत्ति, देखें किसे कितना मिला

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UP Scholarship Update: उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए शनिवार का दिन बेहद खास रहा। Lucknow स्थित लोक भवन सभागार में आयोजित एक भव्य राज्यस्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं को बड़ा उपहार दिया। CM Yogi डीबीटी (DBT) छात्रवृत्ति (Scholarship) ट्रांसफर यूपी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए बटन दबाकर सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में स्कॉलरशिप और फीस रीइंबर्समेंट की राशि भेजी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि वित्तीय तंगी के कारण प्रदेश में किसी भी मेधावी या जरूरतमंद छात्र की पढ़ाई नहीं रुकने दी जाएगी। राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और हर पात्र छात्र तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

4.60 लाख छात्र-छात्राओं के खातों में 148.04 करोड़ रुपये की राशि स्थानांतरित

लोक भवन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 4,60,559 छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में कुल 148.04 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए ट्रांसफर की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सांकेतिक रूप से 11 छात्र-छात्राओं को मंच पर बुलाकर अपने हाथों से छात्रवृत्ति (Scholarship) के प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।

प्रमाणपत्र पाने वाले विद्यार्थियों में रणबीर वर्मा, अजीत रावत, अंश मिश्रा, अलकैफ, अनन्या अवस्थी, मिली, अधिकांश वर्मा, करिश्मा, बुशरा, अभिषेक यादव और साइमा शामिल रहे। मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान और सहायता पाकर इन सभी विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

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इस वर्ष 70 लाख विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि यह तो बस एक शुरुआत है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने प्रदेश के करीब 70 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ देने का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। आंकड़े साझा करते हुए उन्होंने बताया कि बीते वर्ष लगभग 69 लाख विद्यार्थियों को करीब 6,200 करोड़ रुपये की Scholarship वितरित की गई थी।

वहीं, साल 2017 से पहले की बात करें तो इस मद में महज 2,900 करोड़ रुपये के आसपास ही खर्च हो पाते थे। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि हर हाल में आगामी 26 जनवरी तक सभी पात्र छात्र-छात्राओं के खातों में छात्रवृत्ति की राशि पहुंच जानी चाहिए।

वंचित रहे चार लाख विद्यार्थियों को भी दिया जा रहा योजना का लाभ

अक्सर देखा जाता है कि आवेदन पत्र में मामूली त्रुटियों या तकनीकी खामियों की वजह से कई छात्र योजना के लाभ से छूट जाते हैं। इस विषय पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जो लगभग चार लाख विद्यार्थी तकनीकी वजहों से छात्रवृत्ति पाने से वंचित रह गए थे, उन्हें भी इस बार विशेष व्यवस्था करके योजना में शामिल किया जा रहा है और लाभ दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि किसी भी बच्चे का भविष्य तकनीकी कागजी अड़चनों की वजह से अधर में नहीं लटकना चाहिए।

ओबीसी और अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिला सबसे अधिक लाभ

शनिवार को जारी की गई 148.04 करोड़ रुपये की कुल राशि के वितरण पर नजर डालें तो इसमें से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 2,23,615 विद्यार्थियों के खातों में 60.01 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। वहीं अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के 1,59,959 छात्र-छात्राओं को 64.54 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई मिली है।

इसके अतिरिक्त सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों को 11.43 करोड़ रुपये और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 छात्र-छात्राओं को 12.06 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इस तरह सभी वर्गों के जरूरतमंद बच्चों को पारदर्शी ढंग से मदद पहुंचाई गई है।

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ऑनलाइन और आधार आधारित प्रणाली से खत्म हुई बिचौलियों की भूमिका

व्यवस्था में आए सुधारों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले छात्रवृत्ति के लिए विद्यार्थियों को सरकारी दफ्तरों और बिचौलियों के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन अब सरकार ने आवेदन से लेकर पैसों के भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और ऑनलाइन कर दिया है।

आधार आधारित भुगतान प्रणाली के लागू होने से अब पैसा सीधे छात्र के बैंक खाते में जमा होता है। इस पारदर्शी पैकेट सिस्टम के कारण दलालों और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई है, जिससे छात्रों का समय और ऊर्जा दोनों बच रहे हैं।

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वर्ष 2025-26 में 65.95 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुका है लाभ

राज्य सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक प्रदेश के 65.95 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को 4,793 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति और फीस रीइंबर्समेंट का लाभ दिया जा चुका है।

इस योजना के तहत कम आय वर्ग वाले परिवारों के पूर्वदशम यानी कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के साथ-साथ दशमोत्तर कक्षाओं (11वीं, 12वीं, स्नातक, स्नातकोत्तर और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों) में पढ़ाई कर रहे सभी पात्र युवाओं को शामिल किया गया है।

छात्रवृत्ति के पैसों को अच्छी किताबों और पढ़ाई पर खर्च करने की सलाह

मंच से विद्यार्थियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति के रूप में मिलने वाली इस राशि को किसी भी तरह के फिजूलखर्च में न उड़ाएं। बल्कि छात्र इस पैसे से अपने विषय की अच्छी-अच्छी किताबें खरीदें और अपना एक निजी ‘बुक बैंक’ तैयार करें। उन्होंने कहा कि अच्छी किताबें जिंदगी भर काम आती हैं और ज्ञान ही इंसान की असली संपत्ति है।

पूर्ववर्ती सरकारों पर बोला हमला, कहा- अब बदला है यूपी का माहौल

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की उत्तर प्रदेश की स्थिति की तुलना आज के माहौल से की। उन्होंने कहा कि 2016-17 में तत्कालीन सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों तक की छात्रवृत्ति रोक ली थी, जिसे 2017 में हमारी सरकार बनने के बाद बकाए के रूप में छात्रों तक पहुंचाया गया।

उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी के युवाओं के सामने अपनी पहचान का संकट था। आए दिन दंगे और कर्फ्यू होते थे, व्यापारी और बेटियां डर के साए में रहती थीं। लेकिन आज प्रदेश उस बीमारू छवि से बाहर निकलकर रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन चुका है। सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा, “नो कर्फ्यू, नो दंगा, अब यूपी में है सब चंगा।”

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अगले छह महीनों में एक लाख और सरकारी नौकरियों का रखा गया लक्ष्य

प्रदेश में रोजगार और करियर की संभावनाओं पर बात करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी सरकार अब तक 10 लाख से अधिक युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दे चुकी है।

उन्होंने घोषणा की कि आने वाले अगले छह महीनों के भीतर एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य तय किया गया है। परीक्षाएं तय समय पर हो रही हैं, परिणाम आ रहे हैं और युवाओं को बिना किसी सिफारिश के नियुक्तियां मिल रही हैं।

ऑपरेशन कायाकल्प से सुधरी बेसिक शिक्षा की स्थिति

शिक्षा क्षेत्र में हुए सुधारों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से पहले प्रदेश के बेसिक स्कूलों में ड्रॉपआउट दर 19 से 20 प्रतिशत के करीब थी। लेकिन ऑपरेशन कायाकल्प चलाकर स्कूलों का हुलिया बदला गया।

आज स्कूलों में पक्के शौचालय, पीने का साफ पानी, नया फर्नीचर, स्मार्ट क्लासेज और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के करीब 1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर खरीदने के लिए सीधे पैसों की मदद दी जा रही है।

अटल आवासीय और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का हो रहा विस्तार

राज्य में समाज के वंचित और गरीब तबके के बच्चों के लिए चलाई जा रही आवासीय योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 18 मण्डलों में विश्वस्तरीय अटल आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में करीब 18 हजार श्रमिकों और अनाथ बच्चों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है।

इसके साथ ही प्रदेश के 746 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय सफलतापूर्वक चलाए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से 2,300 से अधिक पुराने माध्यमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को चमकाया गया है।

युवाओं को 2047 के विकसित भारत के लिए तैयार करने पर जोर

विद्यार्थियों में जोश भरते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि परिश्रम ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने कहा कि आज जो छात्र 15 से 18 वर्ष की आयु वर्ग में हैं, वे वर्ष 2047 में जब भारत अपनी आजादी की शताब्दी मना रहा होगा, तब देश की सबसे महत्वपूर्ण कामकाजी ताकत होंगे।

विकसित भारत के निर्माण में इन युवाओं की भूमिका सबसे अहम होने वाली है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सरकार की ओर से मुफ्त ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग’ की व्यवस्था भी कराई गई है।

दो करोड़ युवाओं को टैबलेट देने का लक्ष्य, बेटियों को मिलेगी स्कूटी

डिजिटल पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे अभियानों का जिक्र करते हुए सीएम ने बताया कि प्रदेश में दो करोड़ युवाओं को मुफ्त स्मार्टफोन और टैबलेट बांटने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 60 लाख से अधिक युवाओं को टैबलेट दिए जा चुके हैं।

इसके अलावा मेधावी छात्राओं के लिए बड़ी घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि अगले महीने से पात्र मेधावी बेटियों को 50 हजार मुफ्त स्कूटी बांटने की तैयारी पूरी कर ली गई है। वहीं ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ के जरिए बेटी के जन्म से लेकर स्नातक की पढ़ाई तक कुल 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है।

कैबिनेट मंत्रियों और राज्यमंत्रियों ने भी रखी अपनी बात

कार्यक्रम के दौरान पिछड़े वर्ग और कल्याण विभाग के मंत्रियों ने भी अपने विचार रखे। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बताया कि पिछले नौ वर्षों के कार्यकाल में अल्पसंख्यक समाज के 39 लाख से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई है। राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने बताया कि तकनीकी समस्याओं से छूटे छात्रों को विशेष अभियान चलाकर जोड़ा गया है।

राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कुमार कश्यप ने बताया कि चालू वर्ष में अब तक 36.75 लाख ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। वहीं राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि अब विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, जबकि अब उन्हें समय पर योजना का लाभ मिल रहा है।

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