Delhi High Court : दिल्ली उच्च न्यायालय (High Court) में रविवार को एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला, जब जिला न्यायपालिका में अपनी सेवाएं दे रहे 7 वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों ने जज के रूप में पद की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत जजों की कुल संख्या बढ़कर अब 50 हो गई है। यह कदम राजधानी में लंबित पड़े मामलों के जल्द निपटारे और न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बेहद खास माना जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय: सुबह 10 बजे दिलाया शपथ
हाईकोर्ट परिसर में आयोजित इस भव्य और औपचारिक समारोह में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) डी. के. उपाध्याय ने सुबह 10 बजे सभी नए न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने 19 सितंबर को ही इन सभी की नियुक्तियों की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी थी।
शपथ लेने वाले नए जजों के नाम निम्नलिखित हैं:
निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा, भरत पाराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट, अरुण भारद्वाज
दिल्ली उच्च न्यायालय जजों की संख्या: अब भी 10 पद खाली
आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत (Sanctioned) पदों की संख्या 60 है, जिनमें 45 स्थायी (Permanent) और 15 अतिरिक्त (Additional) जजों के पद शामिल हैं। इन 7 नए जजों की नियुक्ति से पहले कोर्ट में 43 जज ही कार्यरत थे। अब यह संख्या 50 पर पहुंच गई है, हालांकि अभी भी स्वीकृत क्षमता के मुकाबले 10 पद रिक्त हैं जिन्हें जल्द भरे जाने की उम्मीद है।
दिल्ली उच्च न्यायालय का इतिहास: लाहौर से लेकर चंडीगढ़ तक का सफर
दिल्ली हाईकोर्ट का अपना एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक सफर रहा है। 31 अक्टूबर 1966 को अपनी अलग पहचान बनाने से पहले दिल्ली की न्यायिक व्यवस्था कई बड़े बदलावों से गुजरी:
लाहौर हाईकोर्ट (1919): आजादी से पहले दिल्ली और पंजाब का पूरा न्यायिक कामकाज 1919 में बने लाहौर हाईकोर्ट के अधीन ही आता था।
पूर्वी पंजाब हाईकोर्ट (1947): बंटवारे के बाद 15 अगस्त 1947 को शिमला के पीटरहॉफ भवन से ‘पूर्वी पंजाब हाईकोर्ट’ की शुरुआत हुई।
चंडीगढ़ शिफ्ट और सर्किट बेंच (1955): जब पंजाब सरकार चंडीगढ़ शिफ्ट हुई, तो हाईकोर्ट भी चंडीगढ़ आ गया और दिल्ली के मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष सर्किट बेंच बनाई गई।
अलग हाईकोर्ट का गठन (1966): दिल्ली के बढ़ते महत्व को देखते हुए 5 सितंबर 1966 को दिल्ली हाईकोर्ट एक्ट पास हुआ और 31 अक्टूबर 1966 को दिल्ली को अपना स्वतंत्र हाईकोर्ट मिल गया।
4 जजों से हुई थी शुरुआत: शुरुआती दौर में दिल्ली हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के.एस. हेगड़े, जस्टिस आई.डी. दुआ, जस्टिस एच.आर. खन्ना और जस्टिस एस.के. कपूर समेत कुल 4 ही जज तैनात थे। यहां तक कि 1971 तक हिमाचल प्रदेश के मामले भी दिल्ली हाईकोर्ट की शिमला बेंच ही देखती थी।
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