CM Yogi Adityanath : शिक्षक दिवस पर सीएम योगी का बड़ा सम्मान, यूपी के 81 शिक्षकों को मिले राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार

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CM Yogi Adityanath : शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को एक बड़ा सम्मान दिया है। सीएम योगी ने गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रदेश के 81 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत आदिकाल से ही ज्ञान का उपासक रहा है और एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम होती है। आइए जानते हैं गोरखपुर में आयोजित इस विशेष सम्मान समारोह से जुड़ी सभी मुख्य बातें।

सीएम योगी ने शिक्षकों को किया सम्मानित

गोरखपुर में आयोजित इस राज्य स्तरीय समारोह में सम्मानित होने वालों में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल रहे। इनमें 33 महिला शिक्षिकाओं को भी सम्मानित किया गया। समारोह में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के 76 शिक्षकों को ‘राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025’ और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के 5 शिक्षकों को ‘मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025’ से नवाजा गया। मुख्यमंत्री ने सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

सभी 81 शिक्षकों को मंच पर बुलाकर सीएम ने दी बधाई

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी की संवेदनशीलता भी देखने को मिली। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें केवल 10 शिक्षकों को ही मंच पर सम्मानित करने का सुझाव दिया था। लेकिन सीएम योगी ने सभी 81 शिक्षकों को मंच पर बुलाकर खुद अपने हाथों से सम्मानित किया। सीएम ने कहा कि मेरठ, हमीरपुर और महोबा जैसे दूर-दराज के जिलों से आए इन शिक्षकों का उत्साह और सम्मान उनके लिए सबसे ऊपर है। भले ही वे खुद काफी अनुशासित और संस्कारित हैं, लेकिन उनके सम्मान का ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा और संस्कार जरूरी

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी देश तभी शक्तिशाली और समृद्ध बन सकता है, जब उसकी युवा पीढ़ी को बचपन से ही राष्ट्र की भावनाओं के अनुरूप शिक्षा और संस्कार मिलें। उन्होंने कहा कि यह महान कार्य केवल एक शिक्षक ही कर सकता है। भारत में वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा और गुरु पूर्णिमा की परंपरा यह दर्शाती है कि हमारी संस्कृति में गुरु और ज्ञान का स्थान हमेशा सर्वोच्च रहा है।

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