National Handloom Day: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी Lucknow के लोकभवन में एक विशेष राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के उत्कृष्ट बुनकरों को सम्मानित किया और राज्य में हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार के प्रयासों को साझा किया।
स्वदेशी आंदोलन और हथकरघा की ऐतिहासिक भूमिका
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी हस्तशिल्पियों और बुनकरों को हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हथकरघा हमारी सांस्कृतिक पहचान का एक मुख्य हिस्सा है।
अपने संबोधन में उन्होंने 7 अगस्त 1905 के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए बताया कि इसी दिन भारत के आजादी के आंदोलन को स्वदेशी के माध्यम से एक नई दिशा मिली थी। यह वह समय था जब महात्मा गांधी का भारतीय राजनीति में औपचारिक पदार्पण नहीं हुआ था, लेकिन स्वदेशी आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत आधार दे दिया था। बाद में गांधी जी के नेतृत्व में यह लड़ाई और तेजी से आगे बढ़ी।
पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यशैली पर तीखा तंज
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों और राजनीतिक विरोधियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि पहले की सरकारों में प्राथमिकता प्रदेश का विकास न होकर व्यक्तिगत दिनचर्या तक सीमित थी।
उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग दोपहर 12 बजे उठते थे और शाम को अपने मनोरंजन में व्यस्त हो जाते थे, उनके पास प्रदेश के विकास और जनता की समस्याओं के बारे में सोचने का समय नहीं था। सीएम योगी ने कहा कि आज राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधरी है, जिससे महिलाओं और आम नागरिकों में सुरक्षा का भाव पैदा हुआ है और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच रहा है।
उत्कृष्ट बुनकरों को मिला राज्य स्तरीय सम्मान
समारोह का मुख्य आकर्षण ‘संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार’ का वितरण रहा। मुख्यमंत्री ने विभिन्न श्रेणियों में चयनित 12 उत्कृष्ट बुनकरों को यह पुरस्कार प्रदान किए। इस योजना के तहत प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले बुनकर को 1 लाख रुपये, द्वितीय स्थान वाले को 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान पाने वाले को 25 हजार रुपये की सम्मान राशि दी गई।
इस बार भी पुरस्कारों में वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों के बुनकरों का दबदबा देखने को मिला:
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साड़ी और ड्रेस मैटेरियल श्रेणी: चोलापुर (वाराणसी) के जमालुद्दीन को जामदानी साड़ी के लिए पहला, रामनगर के अनिकेत कुमार मौर्य को दूसरा और आजमगढ़ के मो. अकमल को तीसरा पुरस्कार मिला।
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दरी एवं आसनी श्रेणी: सीतापुर के अकील अहमद को प्रथम, कानपुर नगर के मो. शारिक अंसारी को द्वितीय और बरेली के मुन्ने अली को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
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होम फर्निशिंग श्रेणी: बिजनौर के कफील अहमद पहले, बागपत के प्रमोद कुमार दूसरे और गोरखपुर के फैजुल हसन अंसारी तीसरे स्थान पर रहे।
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स्टोल और गमछा श्रेणी: वाराणसी के प्यारे लाल को प्रथम, बाराबंकी की आयशा बानो को द्वितीय और गोरखपुर के रेहान वसीम को तृतीय पुरस्कार दिया गया।
सरकार ने इस अवसर पर अन्य योजनाओं के लाभार्थियों को भी सहायता राशि सौंपी और भरोसा दिलाया कि बुनकरों को आधुनिक सुविधाएं और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।
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