भारत में दौड़ी पहली hydrogen train: भारतीय रेल (Indian Railway)के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। हरियाणा (Haryana) के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन सोनीपत के लिए रवाना हो चुकी है। इस नई शुरुआत के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो गया है, जिनके पास अपनी खुद की हाइड्रोजन रेल तकनीक है। पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए चलने वाली यह ट्रेन आने वाले समय में देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम की तस्वीर बदलने वाली है। आइए जानते हैं इस ट्रेन और इसके पहले सफर से जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प बातें।
PM Modi ने Train को दिखाई हरी झंडी
इस ऐतिहासिक ट्रेन को PM Modi ने हरी झंडी दिखाकर राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने इस उपलब्धि को ‘मेक इन इंडिया’ (Make In India) अभियान की एक बड़ी और शानदार सफलता बताया। इस खास मौके पर ट्रेन को चलाने वाले असिस्टेंट लोको पायलट गगनदीप सिंह (Gagandeep Singh) का नाम भी हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। गगनदीप देश के पहले ऐसे पायलट बन गए हैं जिन्हें इस आधुनिक तकनीक वाली ट्रेन को संचालित करने का गौरव हासिल हुआ है। ट्रेन चलाने से पहले ऑपरेटिंग स्टाफ को चेन्नई में विशेष तौर पर चार दिनों की ट्रेनिंग दी गई थी ताकि वे सुरक्षा मानकों और इस नई तकनीक को अच्छी तरह समझ सकें।
भारत में ही डिजाइन की गयी हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train)
तकनीक की बात करें तो यह हाइड्रोजन ट्रेन भारत में ही डिजाइन और विकसित की गई है। आसमानी नीले और सफेद रंग की इस सुंदर ट्रेन में 3200 हॉर्सपावर की गजब की क्षमता है, जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाती है। इसमें 8 पैसेंजर कोच और 2 पावर कोच लगाए गए हैं। गगनदीप सिंह ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि ट्रेन में सुरक्षा का खास ख्याल रखा गया है। इसमें आग से बचाव के लिए ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशर और किसी भी खतरे को भांपने के लिए 26 अलग-अलग सेंसर लगाए गए हैं, जो किसी भी गैस लीक या अनहोनी की स्थिति में तुरंत सुरक्षा सिस्टम को सक्रिय कर देते हैं।
भारतीय रेलवे का जीरो एमिशन पर बड़ा कदम
इस प्रोजेक्ट के साथ भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने शून्य कार्बन उत्सर्जन (zero emission) की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। पारंपरिक बिजली ट्रेनों की तरह इस ट्रेन को चलाने के लिए ट्रैक के ऊपर भारी-भरकम बिजली के तारों (ओवरहेड वायर) की कोई जरूरत नहीं पड़ती। इसमें ट्रेन के भीतर ही हाइड्रोजन फ्यूल सेल की मदद से बिजली बनाई जाती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली जहरीली गैसों की जगह सिर्फ पानी की भाप निकलती है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि भारत की दूसरे देशों से डीजल आयात करने की निर्भरता भी घटेगी। आने वाले दिनों में रेलवे का लक्ष्य ऐसी और भी ट्रेनें देश के अलग-अलग हिस्सों में चलाने का है।







